केंद्र सूखा से निपटने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करें: SC

नई दिल्ली : बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सूखा के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस हालात से निपटने के लिए स्पेशल टास्क फोर्श का गठन करना चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट सूखा पर अपना फैसला तीन हिस्सों में सुनाएगा, जिसमें से आज यह पहला था। इससे पहले कोर्ट ने केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को सूखे की समस्या को गंभीरता से न लेने पर फटकार लगाई थी।

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि राज्यों को सूखाग्रस्त घोषित करने से पहले वहां के किसानों द्वारा की जा रही आत्म हत्या और किसानों के पलायन को भी शामिल किया जाए। कोर्ट ने कृषि सचिव से कहा कि वह बिहार, हरियाणा, गुजरात के मुख्य सचिव के साथ एक हफ्ते की भीतर मीटिंग करके तय करें कि वहां सूखे के हालात हैं या नहीं। कोर्ट के आदेश के बाद ड्रॉट मैनुअल को भी रिवाइज किया जाएगा, जिसमें समय सीमा तय की जाएगी कि राज्य कब सूखा ग्रस्त घोषित कर सकते है।

20 अप्रैल को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सूखे की स्थिति पर शपथ पत्र की बजाए टिप्पणी प्रस्तुत करने को लेकर गुजरात को खरी-खोटी सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि आपने हलफनामा क्यों नहीं दाखिल किया। चीजों को इतना हल्के में न लें। आप गुजरात है, इसका ये मतलब नहीं है कि आप कुछ भी करेंगे।

केंद्र की जिम्मेदारी बताते हुए कोर्ट ने कहा था कि राज्य को सूचित करने का जिम्मा केंद्र का है और वो पहले से चेतावनी दे कि कम बारिश होने वाली है। कोर्ट ने कहा था कि अगर आपको बताया जाता है कि किसी राज्य के एक खास एऱिया में फसल का 96 फीसदी हिस्सा उगाया जाता है लेकिन आपको यह सूचना मिले कि वहां कम बारिश होगी, तो उन्हें यह मत कहिए सब ठीक है।

बल्कि इन राज्यों को बताइए कि वहां सूखा पड़ने की संभावना है। पिछले साल की तुलना में इस साल हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, ओड़िशा, राजस्थान, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में प्रमुख जलाशयों में जल का स्तर बहुत कम हो गया है और वहां सूखे की गंभीर स्थिति है।

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -