राजाधिराज की सवारी में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

मध्यप्रदेश का धार्मिक शहर उज्जैन जहां के कण - कण में शिव का वास है जहां हर पल शिव मंत्रों की गूंज सुनाई देती है वहां श्रद्धालु शिव नाम की माला निरंतर जपते रहते हैं। यही नहीं जिस नगरी के राजा स्वयं श्री महाकालेश्वर माने जाते हैं उस नगरी में आखिर उनकी शोभायात्रा कैसे न निकले। यहां श्रावण और भाद्रपद में भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी का आयोजन किया जाता है। बाबा श्री महाकालेश्वर चांदी की पालकी में सवार होकर अपने विभिन्न स्वरूपों में दर्शन देते हैं।

श्रावण और भाद्रपद के प्रति सोमवार को मंदिर से राजाधिराज श्री महाकालेश्वर चांदी की पालकी में सवार होकर जैसे ही निकलते हैं श्रद्धालु दोनों हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते हैं श्री महाकालेश्वर की एक झलक पाकर श्रद्धालु अभिभूत हो जाते हैं। श्री महाकालेश्वर अपने विविध रूप में श्रद्धालुओं दर्शन देते हैं। सवारी की एक झलक पाते ही श्रद्धालुओं के चेहरे खुशी से चमक उठते हैं। यही नहीं। भगवान श्री महाकालेश्वर अपनी 4 थी सवारी में गरूड़ पर विराजित हो शिवतांडव स्वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। इसी के साथ इसकी अगली सवारी में श्री महाकालेश्वर होलकर स्वरूप में दर्शन देते हैं। 

दरअसल रियासतकाल में इंदौर के महाराजा होलकर की ओर से श्री महाकालेश्वर को जो मुघौटा भेंट किया गया उस स्वरूप में भगवान श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। यही नहीं इसके साथ ही भगवान के वे मुघौटे भी सवारी में शामिल किए जाते हैं जो पहले पालकी में विराजित किए जा चुके हैं। सवारी को सशस्त्र बल द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर दिया जाता है और सवारी मार्ग कड़ाबीन के धमाकों से गूंज उठता है। राजाधिराज की पालकी का सम्मान अश्वारोही दल द्वारा शाही अंदाज़ में किया जाता है। इसके साथ ही सेवादल, मानसेवी अधिकारी और भक्त मंडली के सदस्य कहारों द्वारा उठाई गई पालकी के साथ चलते हैं। श्रद्धालु राजाधिराज श्री महाकालेश्वर के दर्शन कर गद्गद् हो उठते हैं। 

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