कटाक्ष: सदन में हंगामा भी जरुरी है भाई

कटाक्ष: सदन में हंगामा भी जरुरी है भाई

संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया है. सभी प्रार्थना कर रहे है या ऐसा दिखा रहे है कि ये सत्र हंगामे की भेंट न चढ़े. क्यों भाई ऐसा क्यों?. जो आज तक नहीं हुआ उसकी जरुरत अब क्यों आन पड़ी?. देखिये देश में काम और जनता की भलाई तो हो ही जाएगी फिर सदन में हंगामे के मौके रोज रोज नहीं आते. यही तो वो जिम्मेदारी है जिसे सब बड़ी शिद्दत से निभाते है. जब सत्ताधारी भी विपक्ष में थे तो उन्होंने भी अपना कर्तव्य निभाने में कोई कोर कसर छोड़ी थी क्या? अब सदन की कार्यवाही से पहले ही विपक्ष किसी खास बिल के पास हो जाने को लेकर चिट्ठी लिखकर समर्थन देने की बात कह रहा है. वही सत्ताधारी सदन की कार्यवाही में विघ्न न डालने के भाषण और पत्र लिख कर गुजारिश मोड में खड़े है. शानदार, अद्भुद, अविश्वसनीय अकल्पनीय, जबरदस्त, बेमिसाल, उम्दा, झमाझम मानसून सत्र की इतनी अच्छी शुरुआत तो इतिहास में भी दर्ज नहीं है. पर ये सियासत है हर किसी को समझ नहीं आती.

बहरहाल सदन में हंगामा होना ही चाहिए. बिना हंगामे के काहे का भारतीय सदन. हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित, फिर कल तक के लिए स्थगित ये शब्द कितने अपने से लगते है. एक अपनापन है इसमें वो बात सुचारु रूप से कार्यवाई में कहा. सदन की कार्यवाही हंगामे की भेट चढ़ जाना या सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए सदन के काम काज में खलल  पैदा कर मेजों और कुर्सियों को पीटना, सदस्यों की बेहद गिरी हुई हरकतों ने सदन की मर्यादा को रौंदना, यह हमारे सात दशक की आजादी का गौरवशाली इतिहास है. इसे हम गवा नहीं सकते.

तो क्या हुआ अगर आंकड़े यह कहते है कि सदन की एक मिनट की कार्यवाही का खर्चा 2.5 लाख रुपए है और एक दिन में कम से कम 8 घंटे काम के 12 करोड़ रुपए लग रहे है . बड़ी इकोनॉमी के मालिक बन चुके देशों में ऐसी छोटी छोटी बातें होती रहती है. देश के तारणहारों को मेजों और कुर्सियों को पीटने के लिए इतना खर्च करना तो बनता है. वैसे भी देश में करने के लिए कुछ है नहीं. भाषणों के विकास के पथ पर अग्रसर भारत वर्ष में न गरीबी है, न बेरोजगारी है, न किसान आत्महत्या कर रहा है. हर किसी के पास अगले जन्म तक की रोटी, कपडा, मकान है. सड़के विदेश की सड़कों को शरमा रही है. महिलायें और बेटियां इतनी सुरक्षित है कि विदेशों के अखबारों में निर्भया और कठुआ के रक्त रंजीत शर्मनाक इतिहास को सदा के लिए दर्ज किया गया है.

चारों ओर सीमाओं पर असीमित क्षितिज तक शांति ही शांति. सपनों के भारत से भी सुन्दर हिंदुस्तान का निर्माण कर देने के बाद अब सदन में हंगामा तो बनता है.............. 

यह भी देखे

मानसून सत्र की हंगामेदार शुरुआत

संसद का मानसून सत्र: महिला आरक्षण बड़ा मुद्दा