मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने आखिरी दम तक नहीं मानी थी हार, आतंकियों को दिया था मुहतोड़ जवाब

नई दिल्ली:  भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26 नवंबर 2008 के दिन कुछ पाकिस्तानी आतंकियों ने एक भीषण हमला कर दिया था और इस हमले में कई लोगों की जान चली गई थी. इस हमले में आतंकियों से लड़ते हुए देश की सेना के कुछ जवान भी शहीद हुए थे और इनमे से एक सैनिक शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन भी थे. आज उनकी पुण्यतिथि है और उनकी पुण्यतिथि के इस अवसर पर आज हम आप सभी को उनके पराक्रम से रूबरू कराते है. 

शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का जन्म 15 मार्च 1977  में केरल के कलिकत शहर में हुआ था. उन्हें बचपन में क्रिकेट का बहुत शौक था लेकिन बड़े होते-होते उनका रुझान सेना की तरफ बढ़ने लगा और बहुत कम उम्र में ही उन्होंने यह तय कर लिया था कि उन्हें सेना ज्वाइन कर देश की सेवा ही करनी है. वे 1995 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में शामिल हो गए थे. वे ओस्कर स्क्वाड्रन का हिस्सा थे और एनडीए के 94 वें कोर्स के स्नातक भी थे. 

शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन को मुंबई के 26/11 हमले के दौरान अपने आखरी दम तक आतंकियों से लड़ने के लिए आज भी याद किया जाता है. दरअसल 26 नवंबर 2008 के दिन कुछ पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में ताज पैलेस होटल पर हमला कर के इसके कुछ इलाकों में कई लोगों को बंदी बना कर रखा था और मेजर संदीप अपनी टीम के साथ इन आतंकियों से लड़ने पहुंचे थे. यहाँ पर वे जब आतंकियों के समीप पहुंचने वाले थे तो वे उनकी गोलियों का शिकार हो गए. लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी अंतिम सास तक आतंकियों से डट कर मुकाबला किया और उन्होंने मरते वक्त भी अपने साथियों से यही कहा कि तुम ऊपर मत आना मै इन्हे संभाल लूंगा. 

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