दो पल के मज़े के लिए जीवन भर की सज़ा क्यूं

Nov 16 2016 03:59 PM
दो पल के मज़े के लिए जीवन भर की सज़ा क्यूं

कथित संत साध्वी देवा ठाकुर द्वारा एक वैवाहिक समारोह में अपने अंगरक्षकों के साथ गोली चलाए जाने और इसके बाद एक महिला की मौत हो जाने के बाद की कथित घटना से फिर सुर्खियों में हैं। इस बार जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं उससे वैवाहिक समारोह में रोमांच के नाम पर उपयोग में आने वाले हथियारों और उनके संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर अपने परिजन के बीच प्रसन्नता के इन क्षणों को हम केवल एक ट्रिगर दबाकर क्यों खत्म कर देना चाहते हैं क्यों हम दिखावे पर जाते हैं और बंदूकों और तलवारों का प्रदर्शन करते हैं।

शक्ति प्रदर्शन से आखिर हमें हासिल क्या हो जाता है हमें मिल क्या जाता है। यही नहीं यदि निशाना गलत जगह लग जाए तो विवाह का यह जश्न गम में बदल जाता है। इस तरह से ये हालात दो पल का मजा और जीवनभर की सजा के तौर पर बन जाते हैं। हालांकि समारोह में हर्ष फायर के तौर पर की जाने वाली फायरिंग के लिए अलग गोली आती है जिसके छूटने पर वातावरण में कागज बिखर जाते हैं यार फिर कुछ भी नहीं बिखरता है।

यह गोली केवल एक छोटे से पटाखे की तरह होती है लेकिन इससे होने वाले फायर की आवाज़ हर्ष फायर की तरह होती है। क्या हमें इन आयोजनों में फायर का उपयोग करना है तो फिर गोलियों के स्थान पर इस तरह का उपयोग किया जा सकता है और यह उचित भी है लेकिन हमारी थोड़ी सी असावधानी लोगों के लिए परेशानी बन जाती है। साध्वी ने अपने प्रदर्शन के दौरान यदि इस बात का ध्यान रखा होता तो सेलिबे्रेशन मातमी सन्नाटे में नहीं बदलता।