आतंकवाद के मसले पर रूस ने साधी चुप्पी

नई दिल्ली : भले ही भारत द्वारा ब्रिक्स सम्मेलन के माध्यम से रूस को आतंकरोधी अभियान में भारत एकजुट करने का प्रयास कर रहा है लेकिन इसके बाद भी रूस इस मसले पर भारत के लिए अधिक कारगर नज़र नहीं आ रहा है। दरअसल रूस चीन की राह पर पहुंच गया है। ब्रिक्स सम्मेलन में पाकिस्तान को अलग - थलग करने की भारत की योजना कुछ मुश्किल में पड़ती नज़र आई। जी हां, रूस ने भी पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के मसले पर चुप्पी साध ली।

दरअसल जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा का नाम गोवा डिक्लेयरेशन में लाए जाने के भारत के प्रयास को चीन ने काफी कमजोर कर दिया। रूस ने पाकिस्तान के दोनों आतंकी संगठनों को लेकर भारत के प्रस्ताव पर खामोशी बना ली। दरअसल ब्रिक्स में सम्मिलित देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा घोषित आतंकी संगठनों की सूची को स्वीकार करने के लिए कृत संल्पित है। इस तरह की बात ब्रिक्स सम्मेलन में सामने आई हालांकि इस मामले में रूस ने खुलकर कुछ भी नहीं कहा और चुप्पी साधकर रखी।

रूस के रवैये के कारण पाकिस्तान के साथ नज़दीकियों बढ़ गई हैं। पाकिस्तान के ही साथ रूस ने एंटी टेरर एक्सरसाइज कहकर सैन्य अभ्यास भी किया। जैश ए मोहम्मद का नाम गोवा डिक्लेरेशन में शामिल होने के बाद भारत की सहायता न की हो मगर उसने सीरिया के जभात अल नुसरा संगठनको आतंकी संगठन घोषित करने की बात कही है। रूस सीरिया में अल नुसरा को निशाने पर ले  रहा है।

अल नुसरा संगठन सीरिया में बशर अस असद की सरकार को गिराने का विद्रोह चला रहा है। दरअसल उरी और पठानकोट में हुए आतंकी हमले के लिए जैश ए मोहम्मद ने जवाबदारी ली थी। गोवा डिक्लेरेशन के आ जाने के एक दिन पूर्व व्लादिमीर पुतिन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वस्त कर दिया गया था कि वे इस तरह की बात नहीं करेंगे। वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे देश के हित प्रभावित हों।

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