भारत में भड़की जनता का नारा- "कंगना रनौत को करो देश से बाहर"

भारत को “भीख में आजादी” मिलने को लेकर बॉलीवुड फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस कंगना रनौत के विवादित बयान पर देश भर में उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग हो रही है तथा कई स्थानों पर उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई है। विपक्ष के साथ-साथ सरकार के कई नेताओं ने भी कंगना रनौत के बयान की आलोचना की है। वही हाल ही में कंगना ने एक न्यूज चैनल के प्रोग्राम में कहा था कि भारत को असल मायने में स्वतंत्रता 2014 में मिली। उनका इशारा भाजपा के केंद्र में सरकार बनाने से था। उत्तराखंड के हरिद्वार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कंगना के विरुद्ध दो स्थानों पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। रुड़की एवं ज्वालापुर में दायर शिकायतों में कंगना के ऊपर स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों का अनादर करने का आरोप लगाया गया है। वहीं महिला कांग्रेस की तरफ से राजस्थान के चार शहरों जोधपुर, जयपुर, उदयपुर तथा चूरू में कंगना रनौत के विरुद्ध इसी मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। जोधपुर महिला कांग्रेस समिति की अध्यक्ष मनीषा पंवार ने शिकायत में बोला कि कंगना रनौत ने अपने बयान के जरिए स्वतंत्रता सेनानियों तथा देश की जनता का अनादर किया, जो ‘देशद्रोह की श्रेणी’ के तहत आता है। वही इसके अतिरिक्त AAP ने मुंबई पुलिस को शिकायत की एक अर्जी देते हुए कंगना रनौत के विरुद्ध एक मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। इसमें कंगना के विरुद्ध आईपीसी की धारा- 504, 505 तथा 124(ए) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई। AAP कार्यकर्ताओं ने गाजियाबाद में भी एक शिकायत दर्ज कराई है। इससे पूर्व शिवसेना ने भी बताया था कि कंगना के विरुद्ध देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए तथा उनका पद्म श्री पुरस्कार भी वापस ले लेना चाहिए। हाल ही में कंगना ने पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने के एक दिन पश्चात् ही यह विवादित बयान दिया था।

वही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने कंगना के बयान का उत्तर देते हुए कहा कि असली स्वतंत्रता 1947 में ही मिली थी तथा ऐसे विषय वही लोग उठाते हैं जिनके सोचने समझने की हैसियत उतनी ही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने बोला कि कंगना का यह बयान पूर्ण रूप से गलत है। पाटिल ने कहा, “आजादी के लिए देश के संघर्ष पर कंगना रनौत का बयान पूर्ण रूप से गलत है। किसी को भी स्वतंत्रता आंदोलन पर नकारात्मक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।” हालांकि उन्होंने यह भी बोला कि वह नहीं जानते कि किस ‘भावना’ में एक्ट्रेस ने यह बयान दिया। उन्होंने दावा किया, “2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के पश्चात् आम आदमी सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव कर रहा है। अब देश में कोई ऐसा शख्स नहीं है जिसे रोज दो समय का खाना नसीब नहीं होता हो। केंद्र सरकार 105 रुपए में निर्धनों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न दे रही है।" पाटिल ने कहा कि कंगना रनौत पीएम मोदी के 7 वर्ष के कामकाज की प्रशंसा कर सकती हैं, किन्तु उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन की आलोचना करने का हक़ नहीं है।

वही इससे पूर्व लोकसभा सांसद तथा भारतीय जनता पार्टी नेता वरुण गांधी ने कंगना के बयान का वीडियो साझा करते हुए ट्विटर पर लिखा था, “कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, तथा अब शहीद मंगल पाण्डेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस तथा लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का अपमान। इस सोच को मैं पागलपन कहूं या फिर देशद्रोह?” वहीं महात्मा गांधी के पड़पौत्र तुषार गांधी ने शुकव्रार को एक्ट्रेस को नफरत का एक एजेंट बताया। उन्होंने ट्वीट किया, "पद्मश्री कंगना रनौत नफरत, असहिष्णुता तथा अनर्गल उत्साह की एजेंट है। यह चौंकाने वाली बात नहीं है कि उन्हें लगता है कि भारत को स्वतंत्रता 2014 में मिली। घृणा, असहिष्णुता, दिखावटी देशभक्ति तथा दमन को भारत में 2014 में स्वतंत्रता मिली। यह हैरानी की बात नहीं है कि ऐसे बयान उस प्रोग्राम में दिए गए, जिसमें पीएम भी सम्मिलित हुए। आखिरकार आज पीएमओ नफरत का झरना बन गया है जो प्रचुर मात्रा में हमारे देश में बहता है।"

मुंबई और इंदौर में सड़कों पर प्रदर्शन:-
कंगना रनौत के बयान के पश्चात् शिकायतों की मांग के बीच कुछ व्यक्तियों ने सड़कों पर उनके विरुद्ध प्रदर्शन किया तथा पुतले भी फूंके। कंगना रनौत से पद्मश्री वापस लेने की भी मांग की जा रही है। इंदौर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों ने शुक्रवार को कंगना का पुतला फूंका। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, चश्मदीदों ने बताया कि ‘स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी संयुक्त संगठन’ से जुड़े व्यक्तियों ने शहर के एमजी रोड पर रनौत का पुतला फूंका। इस के चलते उन्होंने “वीर शहीदों का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान”, “कंगना रनौत मुर्दाबाद” तथा “कंगना रनौत को देश से बाहर करो” जैसे नारे भी लगाए। प्रदर्शनकारियों ने इंदौर संभाग के आयुक्त दफ्तर को रनौत के विवादित बयान के खिलाफ ज्ञापन भी सौंपा। वही मुंबई में भी एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कंगना के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। 

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