मोहन भागवत ने दिखाया स्वदेशी भाव

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत 6 दिवसीय दौरे पर राजस्थान पहुॅंचे, इस दौरान उन्होंने गौरक्षा के नाम पर होने वाली कथित हिंसा को लेकर कहा कि गाय की रक्षा करने वाले गहरी आस्था को चोट लगने के बाद भी हिंसक मार्ग नहीं अपनाते हैं। वे जामडोली स्थित केशव विद्यापीठ में संचालित हो रहे खण्ड कार्यवाह अभ्यास वर्ग में पहुॅंचे।

इस दौरान एक स्वयंसेवक ने उनसे गौरक्षा के नाम पर होने वाली कथित हिंसा को लेकर सवाल किया। जिस पर उन्होंने कहा कि, गाय का संवर्धन जरूर हो क्योंकि यह हमारे लिए आर्थिक रूप से लाभकारी है। मगर उन्होंने गौरक्षा के नाम पर होने वाली कथित हिंसा को गलत बताया।

सरसंघचालक मोहन भागवत से जब एक स्वयंसेवक ने चीन के सामान के बहिष्कार और स्वदेशी सामान के उपयोग के महत्व को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और गृह उद्योग के संचालन में स्वदेशी का मंत्र नज़र आता है। इन उद्योगों में बनने वाली वस्तुऐं और उत्पाद स्वदेशी का भाव जगाते हैं। इससे लोगों को रोजगार मिलता है और, राष्ट्र गौरव की भावना का विकास होता है। राष्ट्रीय स्वाभिमान को आर्थिक दृष्टि से भी स्वावलंबी होना आवश्यक है। राष्ट्र को आर्थिक दृष्टि से स्वावलम्बी करने का अर्थ स्वदेशी वस्तुओं तक सीमित नहीं है। स्वदेशी का भाव अपने जीवन में भारतीयता के आचरण से प्रकट हो।

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