कोरोना को 'मज़ाक' समझने वाले हो जाएं सावधान, मरने से पहले इस शख्स ने लाइव जाकर बताई सच्चाई

Apr 17 2021 07:13 PM
कोरोना को 'मज़ाक' समझने वाले हो जाएं सावधान, मरने से पहले इस शख्स ने लाइव जाकर बताई सच्चाई

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में लोग त्राहिमाम कर उठे हैं, हर जगह से मन को विचलित कर देने वाली तस्वीरें सामने आ रहीं हैं, कहीं अस्पतालों के सामने एम्बुलेंस में इलाज कराते लोग हैं, तो कहीं श्मशान घाटों में धू-धू करती चिताएं। कहीं दवाइयों के लिए दर-दर भटकते लोग नज़र आ रहे हैं तो कहीं अपने स्वजनों को खोने पर बिलखता परिवार दिखाई दे रहा है। लेकिन इन सबके बाद भी कई ऐसे लोग हैं, जो आज भी देश में लगभग 2 लाख लोगों की जिंदगियां निगल लेने वाली इस बीमारी को हंसी-खेल समझ रहे हैं या फिर इसे घोटाला या स्कैम साबित करने के लिए तरह-तरह के तर्क दे रहे हैं। यही वो लोग हैं जो न मास्क लगा रहे हैं और न ही कोरोना गाइडलाइन्स के किसी अन्य नियमों का पालन कर रहे हैं। यह लोग खुद के साथ ही अपने परिवार और समाज के दूसरे लोगों के जीवन को भी खतरे में डाल रहे हैं।  ऐसे लोगों के लिए ही वाराणसी में 'रोटी बैंक' चलाने वाले किशोर कांत तिवारी बड़ी सीख देकर गए हैं। 

वाराणसी की गलियों में हर हर महादेव के नारों के साथ भूखे लोगों का पेट भरने वाले किशोर कांत ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें इस युवावस्था में ही दुनिया छोड़कर जाना पड़ेगा। वाराणसी के निवासी किशोर कांत तिवारी अपने अनूठे ‘रोटी बैंक’ के लिए देश भर में मशहूर थे।  इसके जरिये वे कई गरीब और निराश्रित लोगों की मदद कर चुके थे । किशोर कांत अपने माता पिता और एक मित्र रोशन पटेल के साथ  सामनेघाट इलाके में एक किराये के मकान में रहते थे। गरीबों के लिए रोटी बैंक का संचालन करने हेतु उन्हें बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के प्रोफेसर और झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर पीके मिश्रा किशोर की सहायता करते थे।  इन्ही किशोर कांत को कुछ दिन पहले अपने तबियत में कुछ खराबी महसूस हुई, तो उन्होंने डॉक्टर के पास जाकर अपनी चिकित्सकीय जांचें कराइ, जिसमे उन्हें टाइफाइड से पीड़ित बताया गया। यह बात खुद किशोर कांत ने अपने वीडियो में कही है। उन्हें पिछले कुछ दिनों से बुखार था, जब उन्हें डॉक्टर ने बताया कि उन्हें टाइफाइड है, तो उसका इलाज ले रहे थे। लेकिन इलाज के दौरान भी जब उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा तो उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटल में जाकर अपना कोरोना टेस्ट कराया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई और उसके बाद किशोर की तबियत लगातार बिगड़ती चली गई और गुरुवार को कोरोना वायरस की चपेट में आने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। मगर जाते-जाते ये समाजसेवी देश के उन लोगों को काफी बड़ी सीख देकर गए हैं, जो कोरोना को मज़ाक समझ रहे हैं और इसके नियमों को सरकार का प्रपंच बताकर उसका विरोध कर रहे हैं। 

अपने बीमार रहने के दौरान किशोर कांत ने लोगों को जागरूक करने के लिए फेसबुक लाइव जाकर कुछ वीडियो भी शेयर किए थे, जो अब उनका निधन हो जाने के बाद वायरल हो रहे हैं। अपने 53 मिनट 39 सेकंड के वीडियो में किशोर बता रहे हैं कि वाराणसी में कोरोना किस कदर कहर ढा रहा है, इसके साथ ही वे लोगों से मास्क लगाने और सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करने की भी अपील कर रहे हैं। वीडियो में खुद किशोर कांत काफी बीमार नज़र आ रहे हैं, बोलते समय भी उनकी साँसें चढ़ रहीं हैं। अंतिम समय में बनाए गए अपने वीडियो में किशोर, इस महामारी के दौर में सभी लोगों से एक दूसरे का साथ देने की अपील कर रहे हैं। एक बात जो किशोर कांत बार-बार दोहरा रहे हैं, वो है कोरोना को हल्के में न लें। अब इस महामारी से ग्रसित होने की पीड़ा उसे झेलने वाले से अधिक तो कोई नहीं जान सकता है, जो लोग यह कह रहे हैं कि कोरोना केवल, वृद्धों, कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को ही शिकार बना रहा है। उन्हें यहाँ ध्यान देने की जरुरत है कि, आज से लगभग 15 दिन पहले तक किशोर खुद वाराणसी की गलियों में घूमकर भूखों को रोटी और मरीजों तक आवश्यक सामग्री पहुंचा रहे थे। लेकिन इसी बीच कब वे कोरोना से संक्रमित हो गए, उन्हें पता भी नहीं चला और इस घातक वायरस ने उन्हें सँभालने और इलाज कराने का मौका भी नहीं दिया और महज चंद ही दिनों में उनकी सांसें उखड़ गई। 

वे युवा थे और शरीर से भी काफी तंदरुस्त थे, तो अगर आप इस गुमान में हैं कि सेहतमंद होने की वजह से कोरोना आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा, तो आप गलत सोच रहे हैं। हमारे देश में ही कई ऐसे उदाहरण हैं, जिसमे नौजवानों ने इस घातक महामारी की चपेट में आकर अपनी जान गँवाई है। इसका एक कारण यह भी है कि लॉकडाउन के कारण बुजुर्ग तो वैसे ही घर के भीतर हैं और बच्चों के स्कूल बंद होने के कारण घरों के अंदर ही रह रहे हैं। ऐसे में उन युवाओं से अपील है जो, घर के काम से या अन्य किसी जरुरी काम से घर से बाहर जाते हैं, वे मास्क, सैनिटाइज़र का इस्तेमाल अवश्य करें और सोशल डिस्टन्सिंग बनाकर रखें क्योंकि आपकी सुरक्षा में ही आपके परिवार की सुरक्षा भी निहित है। 

 

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