Review : जज्बे, जुनून और अन्याय के खिलाफ लड़ाई की कहानी है 'रॉकेट्री द नंबी इफेक्ट'

फिल्म : रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट
कास्ट : आर. माधवन, शाहरुख खान, सिमरन, गुलशन ग्रोवर रजित कपूर और सैम मोहन
लेखक : आर. माधवन
डायरेक्टर : आर. माधवन
निर्माता : सरिता माधवन, आर। माधवन , वर्गीज मूलन और विजय मूलन
रिलीज डेट : 1 जुलाई, 2022
रेटिंग : 4/5

क्या है फिल्म रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट की कहानी- इस फिल्म में आर। माधवन ने निर्देशन में डेब्यू किया है। फिल्म की खास बात ये है कि इसे दो भागों मे बांटा गया है। जी हाँ और इनमे पहले हिस्से में नंबी नारायणन की उपलब्धियों और देश के स्पेस विज्ञान में उनके योगदान को दिखाता है। तो वहीं, दूसरे भाग में अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई को दर्शाया गया है। ऐसे में इन दोनों ही हिस्सों में एक चीज कॉमन है- जुनून। जी हाँ और वास्तव में फिल्म रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट उन सभी जुनूनी लोगों की कहानी है जो अपने हुनर को अपना हौसला बनाते है और घर परिवार को न्यौछावर कर देते हैं। फिल्म उन लोगों की भी कहानी है, जिन्हें ऊपर जाता देख उनके आसपास के लोग ही पीठ में छुरा घोंप देते हैं। इस फिल्म में दिलचस्प बात यह है कि इसमें बॉलीवुड के बादशाह यानी शाहरुख खान भी हैं। वो एक इंटरव्यूवर की भूमिका में हैं। जी हाँ और इस फिल्म की पूरी कहानी बैकग्राउंड में है। नंबी नारायणन अभिनेता शाहरुख खान को कहानी सुनाते हैं, जिसके साथ कहानी आगे बढ़ती है। इस फिल्म के शुरुआत में ही नंबी नारायणन रॉकेट साइंस तकनीक बेचने के झूठे आरोप की खबर सामने आती है, बस यहीं से सिलसिला शुरू होता है। आपको बता दें कि रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट शुरू होती है नांबी नारायणन की जवानी से। जी दरअसल एक हुनरमंद वैज्ञानिक की प्रतिभा को विक्रम साराभाई पहचानते हैं और ए पी जे अब्दुल कलाम भी उनका साथ देते हैं। वहीँ दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में से एक प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में नांबी पढ़ने जाते हैं। नासा में नौकरी पाते हैं लेकिन देश के लिए वे नासा को छोड़ देते हैं। वहीं स्कॉटलैंड से 400 पाउंड के स्पेस उपकरण फ्री में ले आना, फ्रांस से तकनीक सीखकर उनसे बेहतर रॉकेट इंजन बनाना, अमेरिका के विरोध के बावजूद रूस से क्रायोजेनिक इंजन के पार्ट लाना सब कुछ फिल्म में शामिल है। इसी के साथ नंबी उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जाने वाला रॉकेट विकसित करते हैं। रॉकेट का नाम है VI AS। सफल टेस्टिंग के बाद नंबी अपनेगुरु के नाम का के वह जाकर बीच में लिख देते हैं। वहीं रॉकेट का नाम पड़ता है, विकास।

जी हाँ और ये विकास रॉकेट ही आज तक इसरो से भेजे जाने वाले उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जा रहा है। हालांकि, कहानी में मोड़ तब आता है जब उन पर रॉकेट साइंस तकनीक बेचने के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया जाता है। उन्हें थर्ड डिग्री दिया जाता है। उनके हाथ से चाय का कप गिरा दिया जाता है। उनकी परिवार को तिरस्कार की नजरों से देखा जाता है। माधवन अकेले ही इस सिस्टम से जूझ रहे हैं, ठीक वैसे जैसे कभी नांबी नारायणन खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए सिस्टम और न्यायपालिका से जूझ रहे थे।

फिल्म में उन्नी का किरदार बेहद महत्वपूर्ण दिखाई पड़ता है, जो फ्रांस में नंबी नारायणन के प्रोजेक्ट को सफल बनाते हैं। लेकिन इसी प्रोजेक्ट के बीच उनका एकलौता बेटा मर जाता है। ये बात नंबी जानते हैं, लेकिन वह उन्नी को नहीं बताते। हालांकि, उन्नी उन्हें बेरहम कहते हैं। लेकिन अंत तक जो साथ देता है, वह उन्नी ही है। सीबीआई अपनी कार्रवाई पूरी करती है। जांच कर रहा पुलिस अधिकारी फंसाने के आरोप में सस्पेंड हो जाता है। फिल्म के अंत में एक शादी समारोह में नंबी को पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है। हालाँकि फिल्म का अंत सुखद है।


इमोशंस और ह्यूमर से भरपूर है फिल्म- आपको बता दें कि आर। माधवन ने वास्तव में जबरदस्त निर्देशन किया है। फिल्म में दमदार डायलॉग्स हैं।उन्होंने पर्दे पर इमोशंस को सजीव कर दिया। फिल्म में ह्यूमर भी शानदार है। वहीं जब नंबी नारायणन को रॉकेट साइंस तकनीक बेचने के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया जाता है, उस वक्त उनके और परिवार के साथ जो होता है, वो आपकी आंखें नम कर देगा। इसी के साथ जेल में उन्हें यातना देने से लेकर बारिश में पत्नी संग बीच सड़क रास्ते पर धकेल दिए जाने जैसे कई सीन तो इतने मार्मिक हैं। हमें यकीन है इस फिल्म में उनके अभिनय को सदियों तक याद रखा जाएगा।


अभिनय कैसा है- नांबी नारायणन की पत्नी मीरा के रोल में माधवन की हिट तमिल फिल्मों की साथी सिमरन हैं। जी हाँ और नांबी पर जो गुजरी और उसका असर भारतीय समाज से सीधे जुड़ी एक गृहिणी पर कैसा होता है, सिमरन ने जीकर दिखाया है। आप देख सकते हैं इसमें उनका पूरा दर्द निचोड़ देने वाला है। उन्नी के किरदार की अपनी एक अलग पहचान है।

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