बच्चो को सिखाये बड़ो की इज्जत करना

एक पेरेंट होने के नाते यह आपकी जिम्मेदारी है कि अगर आप एक बार भी अपने बच्चों को उनके ग्रांडपेरेंट्स से दुव्र्यवहार करते देखें तो चुप न रहें. यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है और यह भी संभव है कि वे आपसे भी आपके बुढ़ापे में ऐसा ही असम्मानजनक व्यवहार करेंगे. इसलिए आपका पेरेंट्ल मिशन अपने बच्चों और उनके ग्रांडपेरेंट्स के बीच के कम्युनिकेशन गैप भरना होना चाहिए. कभी चीजों का हाथ से निकलने का इंतजार मत कीजिए. बच्चों को समझा दीजिए कि बड़ों की इज्जत करनी ही होगी.

भावनाओं को रोकना या फिर एकदम खुलेमन से अपनी भावनाएं व्यक्त करने के बीच का रास्ता पाना थोड़ा मुश्किल है. इसलिए या तो हम अपनी भावनाएं प्रकट ही नहीं करते या फिर जरूरत से ज्यादा प्रकट करते हैं और फिर गलतियां करते हैं. आप या तो बहुत रिजव्र्ड या यहां तक कि शर्मीली हैं तो आपके बच्चों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने में परेशानी होगी. यदि आप अपने बच्चे और उनके ग्रांडपेरेंट्स के बीच भावनात्मक बंधन चाहती हैं तो सबसे पहले आपको अपने पेरेंट्स के प्रति अपनी भावनाओं को प्रकट करना सीखना होगा और वो भी बच्चों की उपस्थिति में.

पेरेंट्स होने के नाते अपने बच्चों को भी ग्रांड पेरेंट्स के जन्मदिन की तैयारियों में शामिल करें. बच्चों की सक्रिय भागीदारी उनके दिन में बुजुर्गों की अहमियत को बढ़ाएगी. छुटपन से बच्चों की आदत ग्रांड पेरेंट्स को विश करने की पड़ जाएगी तो वे थोड़ा बड़ा होने पर खुद ब खुद हर छोटे-बड़े मौके पर विश करेंगे.

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