द्वितीय विश्व युद्ध का आठ मई से नाता

आठ मई का दिन द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास में अहम दिन है. आठ मई 1945 को जर्मनी के आत्मसमर्पण के साथ छह साल चला युद्ध यूरोप में समाप्त हुआ. साथ ही इस दिन उन लोगों को भी याद किया जाता है. जिन्होंने दूसरे विशव युद्ध की दौरान अपनी जानें गवाई थी.

8 मई 1945 की मध्यरात्रि को 11 बजे बर्लिन में जर्मनी के बिना शर्त आत्मसमर्पण और युद्धविराम के साथ यूरोप में द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत हुआ था. उस समय मॉस्को में क्योंकि नौ मई की सुबह का एक बज रहा था, इसलिए युद्ध की मार से सबसे अधिक पीड़ित रूस में तभी से आठ-नौ मई का दिन 'विजय दिवस' के तौर पर देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पर्व बन गया.

गौरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत सितंबर 1939 में जर्मनी द्वारा पौलैंड पर हमले के साथ हुई. 1933 में अडोल्फ हिटलर के शासक बनने के साथ ही जर्मनी प्रथम विश्व युद्ध में मिली बेइज्जती का बदला लेने और दोबारा शक्तिशाली राष्ट्र बनने की कोशिश में जुट गया. 

प्रथम विश्व युद्ध में हार के बाद जर्मनी को वर्साय की संधि पर जबरन हस्ताक्षर करना पड़े थे. इसके कारण उसे अपने कब्जे वाला बहुत सारा क्षेत्र छोड़ना पड़ा था. अपनी सेना सीमित करनी पड़ी और दूसरे देशों को प्रथम विश्व युद्ध में हुए नुकसान का भुगतान देना पड़ा था. 1939 से 1945 तक चलने वाले द्वितीय विश्व युद्ध में 61 देशों की थल, जल और वायु सेनाएं शामिल थीं. इस युद्ध में विश्व दो हिस्सों, मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र में बंट गया था.

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