रिफाइंड तेल है शरीर के लिए हानिकारक

कॉलेस्ट्रॉल से बचने के लिए हम जिस रिफाइंड तेल का प्रयोग करते हैं, वह हमारे शरीर के आंतरिक अंगों से प्राकृतिक चिकनाई भी छीन लेते हैं. इससे शरीर को आवश्यक फैटी एसिड भी नहीं मिल पाते और आगे चलकर जोड़ों, त्वचा एवं अन्य अंगों संबंधी समस्याएं पैदा होने लगती हैं, जबकि सामान्य तेल में मौजूद चिकनाई शरीर को जरूरी फैटी एसिड प्रदान करती है, जो कि बेहद फायदेमंद होते हैं. शोध के अनुसार खाना पकाने में सरसों तेल, नारियल तेल और घी, जैसे परंपरागत तेल स्वास्थ्य लाभ के मामले में ‘रिफाइंड’ और अन्य तेलों से बेहतर पाए गए हैं.

तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक होता है, लेकिन अगर तेल में से चिपचिपापन निकाल दिया जाये तो ये तेल नहीं रहता. इसके अलावा दालों में प्रोटीन सबसे ज्यादा होता है और दालों के बाद सबसे ज्यादा प्रोटीन तेलों में पाया जाता है. तेलों में प्रोटीन के साथ-साथ फैटी एसिड भी होता है. लेकिन इसको रिफाइन करने के बाद तेलों में दोनों ही नहीं बचते है और उसके बाद तेल एक तरह का केमिकल लेस पानी है, जिसमें आप खाना तो पका सकते है लेकिन इसके आपको कोई भी स्वास्थ्य लाभ नहीं मिलेंगे और साथ ही कई तरह की बीमारियों की वजह बनता है.

खाद्य तेलों को रिफाइंड करने के लिए कई तरह के केमिकल का प्रयोग किया जाता है. जहां किसी भी तेल को रिफाइन करने में 6 से 7 प्रकार के केमिकल प्रयोग किए जाते हैं, वहीं डबल रिफाइंड तेलों में इनकी संख्या 12-13 तक हो जाती है. इन केमिकल्स में से एक भी केमिकल ऑर्गेनिक नहीं होता, बल्कि अन्य केमिकल्स के साथ मिलकर जहरीले तत्वों का निर्माण करने लगते हैं. इन पर किए गए रिसर्च में यह बात सामने आई है कि रिफाइंड तेलों के बजाए पारंपरिक खाद्य तेल का प्रयोग अपेक्षाकृत अधिक सेहतमंद होता है.

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