लाल किले पर ही क्यों फहराया जाता हैं तिरंगा? क्या आपको पता है इसका राज

लाल किले पर ही क्यों फहराया जाता हैं तिरंगा? क्या आपको पता है इसका राज

15 अगस्त के दिन हर साल ही जश्न का माहौल बना होता हैं और हो भी क्यों ना इस दिन हमारे देश को अंग्रेजों से आजादी जो मिली थी. आजाद से लेकर आज तक स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली के लाल किला में प्रधानमंत्री द्वारा तिरंगा फहराया जाता हैं. लाल किला हमारे देश की ऐतिहासिक इमारतों की सूची में शुमार है. लेकिन एक सवाल जो हर किसी के दिमाग में आता है और वो ये है कि आखिर लाल किले पर ही क्यों हर साल तिरंगा फहराया जाता हैं? आइये हम आपको लाल किले के इतिहास के बारे में बताते हैं.

साल 1639 में मुगल बादशाह शाहजहां ने लाल किले का निर्माण करवाया था. पहले लाल किले का नाम 'किला-ए-मुबारक' था. लाल किले को भारत की सबसे खूबसूरत इमारतों की सूची में जगह मिली हैं. इसका डिजाइन उस्ताद अहमद लाहौरी ने बनाया था. खास बात तो ये है कि उस्ताद अहमद लाहौरी ने ही ताज महल का भी निर्माण किया था. लाल किले को यमुना नदी के किनारे बनाया गया है ठीक उसी तरह जिस तरह आगरा का ताज महल यमुना के किनारे बना हुआ हैं. दरअसल मुग़ल बादशाहों को नदियों से बहुत प्यार था और इसलिए वो अपने सभी महल नदी के आसपास ही बनवाते थे. मुगलों ने लाल किले में करीब 200 साल गुजारे हैं.

ये तो सभी को पता हैं कि लाल किले का रंग लाल हैं इसलिए उसका नाम भी लाल किला पड़ गया, लेकिन हम आपको बता दें एक समय ऐसा भी था जब लाल किले का रंग सफ़ेद हुआ करता था. शुरुआत में इसे चूने के पत्थरों से बनाया गया था लेकिन अंग्रेजो के शासनकाल में लाल किला अपनी चमक होने लगा था और इसलिए इस पर लाल रंग पुतवा दिया था. जब भी दुनिया के सबसे महंगे हीरे की बात की जाती है तो सबसे पहले दिमाग में कोहिनूर का ही नाम आता है और ये बात जानकर आपको हैरानी होगी कि वो ही कोहिनूर हीरा लाल किले में स्थित शाहजहां के राज सिंहासन का हिस्सा था. लेकिन जब अंग्रेजों ने भारत में शासन किया तब उन्होंने इस हीरे पर भी अपना कब्ज़ा कर लिया था और इसे अपने साथ ले गए थे.

लाल किले का निर्माण साल 1638 में शुरू हुआ था और इसे बनकर तैयार होने में पूरे 10 साल लगे थे. लाल किले पर आखिर तक रहने वाला मुगल बहादुर शाह द्वितीय था लेकिन अंग्रेजों के सामने वो टिक ना पाया और फिर अंग्रेजों ने बहादुर शाह द्वितीय को एक बंदी के रूप में रख लिया था. इसके बाद लाल किले पर अंग्रेजों ने ही अपना अधिकार जमा लिया था. 1857 में हुई क्रांति के दौरान अंग्रेजो ने अपना गुस्सा निकालने के लिए लाल किले के कई हिस्सों को तबाह कर दिया था और कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन पंहुचा दिया था.

जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली थी तब 15 अगस्त 1947 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने सबसे पहले लाल किले पर ही आजादी का ऐलान किया था. इसके बाद से ही लाल किला भारतीय सेना का गढ़ बन गया और 22 दिसंबर 2003 को इस ईमारत को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग को सौंप दिया था.

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