आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में देश का विकास दर इतना रहने का अनुमान जताया

मुंबईः देश में विषम आर्थिक हालतों के बीच आरबीआइ गवर्नर शशिकांत दास ने देश की ग्रोथ रेट सात परसेंट रहने की उम्मीद जतायी है। अभी हाल ही में मूडीज ने देश का विकास दर घटाया था। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षो में देश की इकोनॉमी को पांच लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाने बैंक उद्योगों को छूट देना जारी रखेगा। गवर्नर शशिकांत दास सिंगापुर में भारतीय बिजनेस कम्युनिटी से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे फाइनेंशियल सेक्टर में सुधार होगा, मांग में तेजी आएगी।

कंपनियों की बैलेंस शीट सुधरेगी और इसका सकारात्मक असर इकोनॉमी पर पड़ेगा। उनके मुताबिक मांग में तेजी लाना इस समय रिजर्व बैंक और सरकार दोनों की प्राथमिकता है। आरबीआइ गवर्नर ने कहा कि कुछ ढांचागत सुधारों की जरूरत है और मुङो खुशी है कि इसपर काम किया जा रहा है। इस वित्त वर्ष के बाकी बचे समय में सरकार सार्वजनिक खर्च बढ़ाएगी, जिससे इकोनॉमी में सुधार आएगा।

दास ने भारत की अर्थव्यवस्था में घरेलू बचत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 में घरेलू बचत जीडीपी का 17.2 परसेंट रही, जबकि शुद्ध वित्तीय बचत की हिस्सेदारी सिर्फ 6.6 परसेंट थी। रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट कम करने पर उनका कहना था कि हमने सुनिश्चत किया कि उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द रेट कट का लाभ मिल सके। इसके लिए हम लगातार बैंकों के साथ संपर्क में हैं। दास ने बताया कि एनबीएफसी अच्छा प्रदर्शन भले ही ना कर रहे हों, लेकिन दूसरे सेक्टरों की बैलेंस शीट अच्छी है और उनका प्रदर्शन भी बेहतर है। सरकार खराब आर्थिक हालत के कारण काफी आलोचना झेल रही है।

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