सीता के स्वयंवर में श्री राम उठाएंगे शिवधनुष्य

रामानंद सागर की रामायण डीडी नेशनल के बाद अब स्टार प्लस पर भी दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब हो रही है. शो में दिखाया जा रहा हर सीन, हर किरदार दर्शकों के दिल खुश कर रहा है. लॉकडाउन के बीच लोग रामायण देख अपना बढ़िया टाइम काट रहे हैं. शो में सीता के स्वयंवर की तैयारी हो रही थी. ऐसे में मिथिला में श्रीराम को देवी सीता के पुष्पवाटिका में दर्शन होते हैं और ये दोनों एक दूसरे को देख बस निहारते रह गए. अपनी सखियों को छोड़ देवी सीता मां लक्ष्मी के मंदिर करने प्रार्थना करने जाती है. सीता की भक्ति से खुश होकर मां लक्ष्मी उन्हें आशीर्वाद के रूप में माला देती हैं. इस माला को पाकर देवी सीता खुश हो जाती है.वहीं दूसरी तरफ श्रीराम का मन विचलित होता है और उन्हें हर पल सीता की छवी दिखाई देने लगती है. यही बात श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण को बताते हैं.

इसके बाद श्रीराम को लगता है कि ये सही नहीं है, क्योंकि देवी सीता परायी स्त्री हैं. परन्तु लक्ष्मण श्रीराम को कहते है कि हो सकता है कि देवी सीता पराई हो ही ना. वैसे विचलित तो देवी सीता का मन भी होता है. उन्हें देखकर लगता है कि वो भी श्रीराम के ख्यालों में खोई हैं और ऐसे में देवी सीता की सखियां उन्हें छेड़ती हैं. वहीं अगले दिन शुरू होती है देवी सीता के स्वयंवर की तैयारी. इसके साथ ही देवी सीता का बहुत खूबसूरत श्रृंगार किया जाता है. वहीं इसी बीच लक्षमण श्रीराम के पास आते है और उन्हें बताते है कि उन्होंने सपना देखा कि स्वयंवर में जीत श्रीराम की हुई है. इसके अलावा इसी के साथ शुरू होता है सीता का स्वयंवर, जिसमें अलग-अलग प्रांत के राजा और राजकुमार शामिल हुए. वहीं इस स्वयंवर की शान देखने महर्षि विश्वामित्र के साथ राजा जनक के महल पहुंचते हैं. वहीं सभा में राजकुमारी सीता पधारती हैं और उनकी नजरे बस श्रीराम को ही देखना चाहती हैं.

मानो देवी सीता जानती हैं कि श्रीराम ही उनके वर हैं परन्तु स्वयंवर में मौजूद सभी के मन में बस यही सवाल था कि कौन धनुष्य को उठाकर देवी सीता का वर बनेगा. इसके बाद एक-एक सभी प्रांत के राजा व राजकुमारों ने शिवधनुष्य को उठाने की नाकाम कोशिश की. ऐसा दृश्य देखकर राजा जनक मायूस हो गए कि कोई भी ऐसा शूरवीर नहीं जो ये धनुष्य उठा सके.वहीं  ये सुनकर लक्ष्मण को क्रोध आता है और क्रोध में लक्ष्मण कहते है कि श्रीराम के होते हुए आप हमारा अपमान नहीं कर सकते. मैं ये धनुष्य तो क्या पूरा महल उठा दु तभी श्रीराम और महर्षि विश्वामित्र, लक्ष्मण को शांत कराते है.राजा जनक सबसे क्षमा मांगते है और फिर श्रीराम महर्षि विश्वामित्र का आशीर्वाद लेकर शिवधनुष्य की ओर बढ़ते है. इसके बाद ऐसे में सभी श्रीराम का मजाक बनाते है और कहते है कि ये बालक कैसे इस धनुष्य को उठाएगा. सबके मन में यही सवाल है कि श्रीराम कैसे इस धनुष्य को उठाएंगे. लेकिन श्रीराम बिल्कुल चिंतित नहीं होते.

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