रमजान: अकेले अदा करें तरावीह की नमाज़, चले इस्लाम पैगंबर के क़दमों पर

आप सभी को बता दें कि इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने को रमज़ान का महीना कहा जाता है. ऐसे में इस महीने में तीस दिनों तक उपवास करना प्रत्येक मुस्लिम के लिए अनिवार्य बताया गया है और यह पाक महीना अब शुरू हो गया है. जी हाँ, आज से यानी 23 अप्रैल से इस महीने की शुरुआत हो गई है. आप सभी को बता दें कि विश्वभर के मुसलमानों के लिए यह उपवास का महीना होता है और इस उपवास के लिए जो अरबी शब्द बोला जाता है उसे कहते हैं ‘सॉम’ इसका शाब्दिक अर्थ है ‘संयम करना.‘ जी दरसल सॉम शब्द इस महीने की सच्ची भावना को दर्शाता है जिसमें सूर्योदय से सूर्यास्त होने तक उपवास रखना होता है.

आपको बता दें कि इस उपवास का मतलब होता है व्यक्ति के मन को अध्यात्म से जोड़ना जिससे उसके अंदर कृतज्ञता और स्नेह का ऐसा भाव उत्पन्न हो जिससे व्यक्ति पूरे वर्ष संयम और नियम चल पाए. इस महीने में सूर्यास्त के एक दम बाद रोज़ा खोला जाता है. वैसे तो आमतौर पर मुस्लिम समाज खजूर और पानी के साथ इफ़्तार करते हैं और इसका कारण यह है की हज़रत मुहम्मद साहब अपना रोज़ा खजूर और पानी से खोलते थे. आप सभी को बता दें कि रमज़ान में मुस्लिम समाज एक अतिरिक्त नमाज़ पढ़ते हैं जिन्हें तरावीह कहा जाता है. जी दरअसल तरावीह की नमाज़ रात की नमाज़ के बाद मस्जिद में सामूहिक रूप से पढ़ी जाती है और इस नमाज़ में पूरा कुरआन रमज़ान के महीने के अंदर पढ़ा जाता है.

वहीं रमज़ान में क़ुरान पढ़ने पर अत्यधिक ज़ोर दिया गया है, ताकि प्रत्येक रोज़ेदार इस पर चिंतन कर सके. वहीं इस समय कोरोना वायरस के कारण सभी ही नहीं बल्कि मुस्लिम भी चिंतित हैं कि वे तरावीह की नमाज़ कैसे अदा करेंगे...? वैसे यह कोई चिंता का विषय नहीं. जी दरअसल हदीस की किताब आल-बुख़ारी में आता है की इस्लाम के पैगंबर तरावीह की नमाज़ अकेले घर पर पढ़ते थे मस्जिद में नहीं. जी दरअसल इसका बड़ा कारण यह है कि एक व्यक्ति अकेले में जैसा ध्यान लगा सकता है, वैसा कई बार समूह में लगा पाना मुश्किल होता है. इस कारण इस बार घर में अकेले ही नमाज अदा की जाए तो एक बेहतरीन शुरुआत होगी.

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