इस कारण राजनीति में आए थे रामविलास पासवान, बेहद दिलचस्प है किस्सा

पटना: भारत के प्रमुख दलित नेताओं में से एक रामविलास पासवान का आज जन्मदिन है। बिहार में जन्मे रामविलास पासवान को राजनीति का ऐसा बेताज बादशाह माना जाता था कि उन्हें राजनीति का 'मौसम वैज्ञानिक' तक बोला जाता था। देश के 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके रामविलास पासवान का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। अपने मिलनसार स्वभाव के कारण वह हर राजनीतिक खांचे में फिट बैठ जाते थे।

बिहार के खगड़िया जिले में 5 जुलाई 1946 को जन्मे पासवान 3 भाइयों में सबसे बड़े थे। पढ़ाई में एक होनहार विद्यार्थी रहे रामविलास पासवान ने बिहार की प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की। तत्पश्चात, उन्हें पुलिस विभाग में पुलिस उपाधीक्षक यानी डीएसपी के पद पर नियुक्ति मिली। स्वयं रामविलास पासवान ने 2016 में बताया था, '1969 मे मेरा DSP मे एवं MLA दोनो मे एक साथ चयन हुआ। तब मेरे एक दोस्त ने पूछा कि बताओ Govt बनना है या Servant ?बस तभी मैंने राजनीति ज्वाइन कर ली।'

 

वही पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की ओर से बिहार के अलोली सीट से उपचुनाव लड़कर उन्होंने कांग्रेस के बड़े नेता को हार दी तथा इसके चलते उनकी आयु सिर्फ 23 वर्ष की थी। यहीं से उनका सियासी करियर आरम्भ हुआ। इसके बाद 1977 में उन्होंने ऐसा रिकार्ड बनाया जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सम्मिलित हो गया।  उन्होंने हाजीपुर से 4.25 लाख मतों से जीत हासिल की तथा अपना ही रिकॉर्ड उन्होंने 1989 में तोड़ दिया जब 5.05 लाख वोटों से जीत हासिल की।

 

 

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आज पारस अस्पताल, पटना में आदरणीय श्री लालू प्रसाद जी से मुलाकात की एवं उनका हाल-समाचार जाना। इस दौरान आदरणीय श्रीमती राबड़ी देवी जी, श्री तेजस्वी यादव जी एवं श्री तेज प्रताप यादव जी से भी मुलाकात हुई। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि प्रभु उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करे। - युवा बिहारी चिराग पासवान (@ChiragPaswanOfficial) 4 July 2022

 

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