रक्षा बंधन : भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी से जुड़ी है रक्षाबंधन की कहानी

Aug 18 2018 04:01 PM
रक्षा बंधन : भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी से जुड़ी है रक्षाबंधन की कहानी

रक्षा बंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रतीक होता है जिसमें बहन अपने भाई से उसकी रक्षा का वचन मांगती है. इस त्यौहार को भारत में बहुत ही खास माना जाता है क्योंकि इसके पीछे  एक पौराणिक कथा भी छुपी हुई है जिसके बारे में आप जानते होंगे. अगर नहीं जानते हैं तो हम आपको बता देते हैं क्या है इसके पीछे की कहानी और क्यों मनाया जाता है रक्षा बंधन का त्यौहार. इसके पहले बता दें, इस बार रक्षा बंधन 26 अगस्त को आ रहा है जिसके लिए तैयारी शुरू हो गयी है.

सावन की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षा बंधन की कहानी हमने हमेशा रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं की सुनी है लेकिन इसके अलावा और भी कथाएं हैं. सबसे पहले कहानी भगवान विष्णु संबंधित है. पुराणों में है जब राजा बलि 110 यज्ञ पूर्ण कर लिए तब देवताओं का डर बढ़ गया, उन्हें ये लगा कि राजा बलि स्वर्ग पर भी कब्ज़ा कर लेंगे इसके लिए मदद माँगने वो भगवान विष्णु के पास गए. 

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भगवान विष्णु ब्राह्मण वेष धारण कर राजा बलि के समझ प्रकट हुए और उनसे भिक्षा मांगी और राजा ने तीन पग भूमि देने का वादा किया. राजा के गुरु ने भगवान को पहचान लिया था जिसके बाद उन्हें सचेत किया लेकिन राजा अपने वचन से नहीं मुकरे और तीन पग ज़मीन दान में दी. विष्णुजी ने वामन रूप में एक पग में स्वर्ग में और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया, दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया और तीसरे पग की जगह ना होने के कारण राजा परेशान हुए और इस दौरान अपना सिर वामन देव के चरणों में रखा और कहा कि तीसरा पग आप यहां रख दें. 

इसके बाद राजा से स्वर्ग और पृथ्वी की जगह छीन ली और वो रसातल लोक में रहने के लिए विवश हो गए. लेकिन राजा ने भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया और भगवान विष्णु को उनका द्वारपाल बनना पड़ा जिससे माँ लक्ष्मी परेशान हो गई. इसी परेशानी से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने नारद जी से सहायता मांगी तब उन्होंने उपाय बताया और लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे राखी बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आईं. बता दें उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी और उसी खास अवसर पर रक्षा-बंधन मनाया जाने लगा.

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