क्या किसान आंदोलन के 'नाराज़ फूफा' हैं राकेश टिकैत ?

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही कृषि कानूनों को रद्द कर दिया है. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या अब किसान अंदोलन समाप्त हो जाएगा. सोमवार को कुछ किसान संगठनों ने आंदोलन ख़त्म होने के संकेत भी दिए थे. किन्तु अब किसान नेता राकेश टिकैत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि, आंदोलन इतनी जल्दी ख़त्म नहीं होगा. वहीं, घर वापसी वाले सवाल पर राकेश टिकैत ने किसान नेताओं से दो टूक कह दिया है कि जो पहले घर जाएगा, वह पहले जेल भी जाएगा.

राकेश टिकैत ने कहा कि, जो चुनाव लड़ने के लिए अधिक उत्सुक हैं, वह जल्दी वापस जाएगा. वही, जेल भी जाएगा. जब घर में भाई भाई का विचार नहीं मिलता, तो यहां पर भी यदि विचार नहीं मिल रहे हैं तो उसमें क्या गड़बड़ है? कुछ लोगों को चुनावी रोग लग जाता है और मैं कहां हलफनामा दूं कि मैं चुनाव नहीं लडूंगा. मेरी जुबान ही मेरा हलफनामा है. मैं चुनाव नहीं लडूंगा. मैं किसानों को लड़वा रहा हूं, किन्तु सड़क पर. सरकार में पेंच है और यदि मैं फूफा बन ही गया हूं, तो मिलाई तो करवा ही दो. 

बता दें कि कानूनों की वापसी के बाद पंजाब के किसान संगठनों ने घर वापसी करने के संकेत दिए थे. मगर राकेश टिकैत ने इससे इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि, सभी लोग अपनी अपनी बात करते हैं और सबका अपना विचार भी होता है. यही लोकतंत्र है. यह कोई सरकार की तरह तो है नहीं, कि एक तरफा निर्णय हो गया. यहां जो भी चीज होती है वह विचार से ही होता है. इसलिए यह संयुक्त मोर्चा है. 

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