राजस्थान हाईकोर्ट की नौकरशाहों को नसीहत

जयपुर : जयपुर के रामगढ़ बांध को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट ने आला अधिकारियों को नसीहत का पाठ  पढ़ाते हुए कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी समझें और जनता को बचाएं.कोर्ट ने बांध को लेकर दिए गए आदेशों की अनदेखी करने पर नाराजगी भी जताई.इस संबंध में शपथ पत्र भी मांगा .

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट की ओर से गठित निगरानी समिति के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेन्द्र डांगी और अधिवक्ता अशोक कुमार भार्गव ने कोर्ट को बताया कि 2012 से अब तक कोर्ट ने कई आदेश दिए हैं. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है. अधिकारियों की इस लापरवाही से नाराज हाई कोर्ट ने सुनवाई 11 अप्रैल तक टालते हुए कई अधिकारियों को तलब किया है. इनमें जयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त, जयपुर नगर निगम सीईओ , दौसा कलक्टर, प्रदूषण नियंत्रण मंडल अध्यक्ष, वन व नगरीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा उद्योग, राजस्व, खान, विधि, जल संसाधन और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव शामिल हैं.

बता दें कि हाई कोर्ट ने यह सख्त रवैया इसलिए अपनाया क्योंकि कमेटी के सदस्यों के अनुसार 22 जुलाई 2016 को जलस्रोतों के विकास के लिए राज्य सरकार से रोडमैप बनाने का काम भी नहीं हुआ.इसके अलावा जयपुर नगर निगम को बंद एसटीपी को चालू कराना था, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण मंडल को कानोता बांध में गंदगी को लेकर कार्रवाई करनी थी और अतिक्रमण भी हटवाने थे. इनमें से कोई भी काम नहीं होने पर कोर्ट ने अधिकारियों को नसीहत दी और उन्हें उनके कर्तव्य याद दिलाए.

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