राहुल गाँधी का सवाल, किसानों को कहते हो डिफॉल्टर, उद्योगपतियों को क्यों नहीं ?

राहुल गाँधी का सवाल, किसानों को कहते हो डिफॉल्टर, उद्योगपतियों को क्यों नहीं ?

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव से पहले पेश किए गए अंतरिम बजट को लेकर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। जिस तरह से नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों को 6000 रुपए सालाना आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है, उस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा है कि प्रति दिन किसानो को मात्र 17 रुपए मिलेंगे, यह किसानों का अपमान है। राहुल ने कहा है कि, कांग्रेस शासित राज्यों में किसानों का ऋण माफ कर दिया गया है, ऐसे में कर्ज माफ़ी किसानों के लिए अंतरिम बजट से काफी बड़ी राहत है। चुनाव से पहले पीएम मोदी के इस चुनावी जुमले को लोग नकार देंगे।

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राहुल गांधी ने कहा है कि, पीएम मोदी के पास किसानों की परेशानियों को लेकर कोई रणनीति नहीं है। पांच वर्षों तक यह सरकार नींद में थी, जब हमने किसानों की परेशानियों को सामने रखा, तब जाकर सरकार हरकत में आई। किसानों की परेशानी को मोदी सरकार ने और बढ़ा दिया है, मोदी सरकार को लगा है कि किसान देश पर बोझ हैं, जबकि मैं इससे अलग सोचता हूं, मैं किसानों को देश की ताकत के रूप में देखता हूं। हमे लगता है कि किसान हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।

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जब राहुल गांधी से सवाल किया गया कि, क्या किसानों का कर्ज माफ करने से बैंकों का एनपीए बढ़ा है, इस पर राहुल ने जवाब देते हुए कहा है कि अगर आपने लोन लिया है और इसे लौटते नहीं हैं तो इसे एनपीए कहते हैं। आप इस लोन किसानों का एनपीए क्यों नहीं कहते हैं। आप यही शब्द किसानों के लिए क्यों नहीं उपयोग करते। सभी उद्योगपति लोन वापिस नहीं लौटाते हैं, तो उनके लोन को एनपीए कहा जाता है, किन्तु जब किसान नहीं लौटाता तो उसे डिफॉल्टर कहा जाता है, किन्तु उद्योगपतियों को डिफॉल्टर नहीं कहते हैं।

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