निरंतर दूसरे हफ्ते गिरी 'आर वैल्यू', जानिए आईआईटी मद्रास का विश्लेषण

इंडिया में बीते चार दिनों से निरंतर 3 लाख से अधिक केस की खबर सुनने को मिल रही है।  ऐसे में अधिकतर विश्लेषक मान रहे हैं कि भारत में कोविड पीक पर चुका है। इस दौरान IIT मद्रास के विश्लेषण ने एक और राहतभरी खबर जारी कर दी है। जिसके अनुसार निरंतर 2 सप्ताह से 'आर वैल्यू' में गिरावट देखने को मिली है। फिलहाल देश में 14 जनवरी से लेकर 21 जनवरी के मध्य औसत आर वैल्यू घटकर 1.57 पर आ गई है जो कि कोविड संक्रमण से राहत के संकेत हैं। इतना ही नहीं इससे पहले दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 के दो हफ्तों में देश में 'आर वैल्यू' के निरंतर बढ़ने के उपरांत बीते सप्ताह यानी 7 से 13 जनवरी को पहली बार इसमें गिरावट दर्ज की गई थी। आर वैल्यू जितनी घटेगी संक्रमण दर उतनी घटेगी।

आसान भाषा में समझें क्या है आर वैल्यू (R Value): आसान वैज्ञानिक भाषा में समझें तो आर वैल्यू (R Value) किसी संक्रमित द्वारा दूसरों को संक्रमित करने की क्षमता की संख्या है। यानी अगर किसी कोविड  संक्रमित की आर वैल्यू एक है, तो उसकी ओर से किसी एक और व्यक्ति के संक्रमित होने का खतरा है। उधर अगर किसी व्यक्ति की आर वैल्यू तीन है, तो वह तीन लोगों के लिए खतरा और भी बढ़ा सकता है। आमतौर पर कोविड के बड़े स्तर पर फैलने के दौरान इंसानों की आर वैल्यू अधिक होती है और लगातार बढ़ते इस आंकड़े को रोकने के लिए सरकारें प्रतिबंधों- कर्फ्यू या लॉकडाउन जैसे कदम उठा रही है। 

25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक पूरे भारत में आर वैल्यू 2.9 तक पहुंच गई थी: जहां इस बारें में यह भी कहा जा रहा है कि  25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक पूरे इंडिया में आर वैल्यू 2.9 तक पहुंच गई थी, जबकि एक जनवरी से 6 जनवरी तक यह आंकड़ा चार तक चला गया था। यानी इस बीच कोई एक पीड़ित औसत तौर पर अपने साथ चार और को कोरोना से संक्रमण का आंकड़ा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर एक नमूने की जीनोम सीक्वेंसिंग करना संभव नहीं है, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि वायरस की यह लहर मुख्यत: ओमिक्रोन की वजह ही है।

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