प्यार की इमारत आज भी है

प्यार की इमारत आज भी है

कल भी तेरी हसरत थी और हसरत आज भी है,
बस एक दीदार हो जाये इतनी सी कोशिश आज भी है,
माना नफरत है आज भी बेइंतहा मेरे सीने में,
फिर भी तुझपे मिट जाने की चाहत आज भी है।

किसकी थी खता, किसका था कुसूर,
इससे क्या फर्क पड़ता है,
जिन्दा है कही वो दिल-ए-जज्बात,
ये हकीकत तो सलामत आज भी है।

एक नजर दीदार हुआ, ये सुकून काफी है,
दीदार को उठी तेरी नजर, इतना अहसास काफी है,
दूरी है बेशुमार फिर भी जिन्दा है कोई जज्बात,
मेरे लिए तेरा इतना अहसास आज भी है।

जो कोई पूछे मुझसे प्यार क्या होता है,
टाइमपास कह चले जाना अंदाज आज भी है,
कोई जो झांक ले दिल में मेरे,
तो तेरे लिए बनी प्यार की इमारत आज भी है।

यूँ तो लिखना आता नहीं मुझे,
पर तुझसे नजरें मिलने पे होने वाला अहसास,
शब्दों में यूँ ही बयाँ कर जाना,
मुझमे ये अंदाज बाकी आज भी है।