पुणे के सिद्धि विनायक हर काम को करते हैं सिद्ध

By Lav Gadkari
Sep 09 2015 04:45 AM
पुणे के सिद्धि विनायक हर काम को करते हैं सिद्ध

भगवान श्री गणेश सभी देवों में प्रथम पूज्य हैं। भगवान श्री गणेश गौरी नंदन और शिव सुत हैं। यूं तो भगवान श्री गणेश श्री हरि विष्णु का ही स्वरूप हैं। एक बार माता पार्वती ने श्री विष्णु जी से प्रार्थना की और भगवान विष्णु प्रसन्न हुए तब माता पार्वती ने वर मांगा कि उन्हें उनके जैसा ही पुत्र चाहिए। ऐसे में भगवान विष्णु जी ने कहा कि मेरे जैसा तो कोई और नहीं हां मगर मैं आपके पुत्र के रूप में जरूर आ सकता हूं।

तब माता पार्वती ने उनके पुत्र स्वरूप में प्राप्त होने की प्रार्थना की। ऐसे में भगवान श्री विष्णु जी ने तथास्तु कहा और फिर वे श्रीगणेश स्वरूप में आए। भगवान श्री गणेश के यूं तो इस धरती पर कई मंदिर हैं मगर भगवान के प्रसिद्ध मंदिरों को अष्ट विनायक के तौर पर जाना जाता है। अष्ट विनायक में ही एक मंदिर पुणे के समीप प्रतिष्ठापित है।

इसे श्री सिद्धिविनायक कहा जाता है। यह मंदिर अहम दनगर जिले की करजत तहसील के सिद्धटेक मे माना जाता है। यहां पवित्र भीमा नदी बहती है। मंदिर का पौराणिक महत्व है। कहा जाता है कि यहां भगवान श्री विष्णु ने तप किया था और सिद्धि प्राप्त की थी। भगवान इसके बाद मधु कैटभ राक्षसों का संहार करने में सफल हुए। माना जाता है कि मंदिर भगवान विष्णु ने निर्मित किया। पहाड़ की चोटी पर भगवान गणेश की मूर्ति प्रतिष्ठापित की।

भगवान श्री गणेश ने ब्रह्मदेव की पुत्रियों को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। कहा जाता है कि यहां प्रतिष्ठापित प्रतिमा स्वयं भू है। इस मूर्ति के ही पास कांसे की प्रतिमा भी विराजमान है। भगवान गणेश की सूंड दांई ओर की है। माना जाता है कि दांई सुंड वाले गणेश बहुत सिद्ध होते हैं। मदिर में भाद्रपद मास और माघ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से पंचमी तक उत्सव की धूम रहती है। यही नहीं चतुर्थी को यहां मेले का आयोजन होता है। बुधवार को श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। भगवान को चने चिरौंजी का प्रसाद चढ़ाया जाता है। यहां आने वाले की हर मनोकामना पूर्ण होती है। श्रद्धालु यहां मोदक भी चढ़ाते हैं।