बाढ़ से लेकर सड़क दुर्घटना तक पर CM योगी आदित्यनाथ ने कही ये बातें

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा कि, 'एक समय उत्तर प्रदेश में करीब 38 जिले बाढ़ की चपेट में होते थे लेकिन आज कहा जा सकता है कि चार से छह जिले ही हैं, जहां बाढ़ की स्थिति होती है।' इसी के साथ उन्होंने कहा- 'समय से प्रशिक्षण, जागरूकता व बचाव के उचित उपाय हों तो आपदा के नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकता है।' जी दरअसल आज यानी बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित आपदा प्रबंधन संबंधी तृतीय क्षेत्रीय सम्मेलन में पहुंचे और यहाँ सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'दो दिवसीय इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में आप सबका स्वागत है। इसमें नौ राज्य जो आपदाओं से प्रभावित रहते हैं, उनका उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अभिनंदन है। यह महत्वपूर्ण सम्मेलन है, क्योंकि यह सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में हो रहा है।'

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इसी के साथ मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि, 'समय से प्रशिक्षण, जागरूकता व बचाव के उचित उपाय हों तो आपदा के नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एनडीएमए को सक्रिय किया। जनपदों में आपदा मित्र की तैनाती भी की जा सकती है। बाढ़ में कुछ घटनाएं प्राकृतिक होती हैं लेकिन कुछ मानव निर्मित भी होती हैं। नदी के कैचमेंट में बस्तियों से ये स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उत्तर प्रदेश में दो महीने बाढ़ के होते हैं। नेपाल से सटे जिलों में पहले बाढ़ आती है, फिर गंगा-यमुना के तटवर्ती जनपदों में बाढ़ की स्थिति होती है। समय से की गई तैयारी और बचाव के उपाय इसके लिए सहायक होते हैं। इससे उत्पन्न स्थिति के लिए ठेकेदारी प्रथा भी एक कारक है। सरयू नदी पर दशकों से एक बांध है, एल्गिन बांध। इसपर दशकों से सैकड़ों करोड़ रुपये बर्बाद कर दिए गए।'

आगे उन्होंने कहा कि, 'हम जब 2017 में आये तो मेरे सामने भी प्रस्ताव आया कि 100 करोड़ रुपये बाढ़ राहत के लिए जरूरत होते थे। मैंने कहा अभी रुक जाइये, अबकी देखने दीजिये, मैंने खुद उसका सर्वेक्षण किया, फिर समीक्षा की। फिर नदी पर चैनलाइज किया गया। जहां 100 करोड़ रुपये सालाना खर्च होते थे। आज विगत पांच वर्ष में पांच से आठ करोड़ रुपये में बाढ़ नियंत्रण किया जा रहा है। पिछले वर्ष आठ करोड़ रुपये की लागत आयी।'

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इसी के साथ मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि, 'एक समय उत्तर प्रदेश में करीब 38 जिले बाढ़ की चपेट में होते थे लेकिन आज कहा जा सकता है कि चार से छह जनपद ही हैं जहां बाढ़ की स्थिति होती है। आपदा, बाढ़, भूकम्प के लिए जागरूकता कार्यक्रम बहुत सहायक होते हैं। आकाशीय बिजली से होने वाली मौतें हमारे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मिर्जापुर सोनभद्र में होती हैं। इसके लिए वार्निंग सिस्टम बहुत जरूरी है। अलर्ट सिस्टम की वजह से बहुत मौतें रोकी जा सकती हैं।'

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अग्निकांड से होने वाली मौतों पर भी हम इस तरह से अच्छा कार्य कर सकते हैं। बहुत बार जंगली जानवरों की वजह से मौतें होती हैं। इसे भी हमने आपदा की हानि की श्रेणी में रखा है। कोरोना से होने वाली मौत भी आपदा की ही श्रेणी में थी, लेकिन समय से किया गया कार्य भारत द्वारा एक मॉडल प्रस्तुत किया गया। 30 हजार 131 मौतें कोविड से हुईं, लेकिन सड़क दुर्घटना में प्रतिवर्ष 22 हजार मौतें होती हैं। यह सड़क दुर्घटना भी एक चिंता का विषय है। इसके लिए भी हमें जागरूकता अभियान की जरूरत है।

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