प्रदूषण मुक्त परमाणु ऊर्जा पर दे जोर

इन्दौर: देश में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत अमेरिका और अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। बिजली की मांग और आपूर्ति में भी काफी अंतर है और इसको पूरा करने के लिये परंपरागत स्त्रोतों से बिजली उत्पादन के साथ प्रदूषण मुक्त परमाणु ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। ये विचार आज यहां भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के निदेशक के.एन. व्यास ने राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र-आरआरकेट में ‘‘न्यूक्लियर रियेक्टर इंजीनियरिंग-सिस्टम डिस्क्रीप्शन, रिलेववेंश एंड चैलेंजेस‘‘ विषय पर विषेष व्याख्यान देते हुये व्यक्त किये।

व्यास आरआरकेट में  त्वरक, लेजर एवं इससे संबधित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विषय पर आयोजित 8 सप्ताह के अभिमुखीकरण पाठ्यक्रम के समापन समारोह बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आरआरकेट के निदेशक डा.पी.डी. गुप्ता ने की, व्यास ने कहा कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिये स्थान, कोयला परिवहन, पानी आदि की अत्यधिक मात्रा में जरूरत होती है, जबकि परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिये काफी कम जगह और अन्य संसाधनों की कम आवश्यकता होती है तथा इससे कार्बन आॅक्साइड का उत्सर्जन भी कम होता है, जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। श्री व्यास ने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में संयंत्र की डिजाइन का विशेष महत्व होता है।

उन्होंने अनेक उदाहरण देकर बताया कि डिजाइन में जरा-सी चूक भी अत्यधिक घातक सिद्ध होती है। श्री व्यास ने  बताया कि भारत सहित विश्व के अनेक देशों में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में चैथी पीढ़ी के संयंत्रों की स्थापना की दिषा में अनुसंधान कार्य जारी है। भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र की गतिविधियों की चर्चा करते हुये व्यास ने बताया कि अनुसंधान केन्द्र में विभिन्न दलहन और तिलहन की अनेक किस्मे विकसित की है। अनुसंधान केन्द्र ने अहमदाबाद के नगर पालिक निगम की एक परियोजना पर काम शुरू किया है। इसके तहत सीवरेज से निकलने वाले पानी को रेडियोएक्टिव विकिरण से शुद्ध कर अवशेंषों से खाद बनाई जायेगी। उन्होंने नमामि गंगे परियोजना में भी भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के योगदान के बारे में भी बताया।

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