तीस्ता सीतलवाड़ की बढ़ी मुश्किलें, 1.4 करोड़ रूपए देने पर घिरी यूपीए सरकार

नईदिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के सबरंग ट्रस्ट को करीब 1.4 करोड़ रूपए का अनुदान दिए जाने के मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने तत्कालीन यूपीए सरकार को घेर लिया है। दरअसल यूपीए सरकार पर इस मामले में सरकार के लिए पाठ्यक्रम की सामग्री बनाने के दौरान धर्म व राजनीति का भ्रष्टाचार करने व दुर्भावना फैलाने के प्रयास भी किए। इस मामले में समिति के निष्कर्षों को शीर्ष कानूनी अधिकारी का समर्थन भी मिला है।

समिति ने कहा कि प्रथम दृष्टया तीस्ता को किसी अधिकारी ने समर्थन दिया है। मगर उन पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने और धार्मिक आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने के ही साथ राष्ट्रीय अखंडता को खंडित करने का आरोप लग सकता है। इस तरह की बात मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित जांच समिति के निष्कर्षों से मिली है। दरअसल सीतलवाड को शिक्षा की राष्ट्रीय नीति योजना के अंतर्गत परियोजना खोज हेतु दिए जाने वाले कोष के वितरण और उपयोग की जांच भी की।

दरअसल उच्चतम न्यायालय के अभिभाषक अभिजीत भट्टाचार्य, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्य ालय के कुलपति एसके बारी और मंत्रालय के अधिकारी गया प्रसाद मौजूद थे। गौरतलब है कि सबरंग ट्रस्ट के प्रकाशन देश के अल्पसंख्यकों में असंतोष जगाते हैं साथ ही देश को गलत तरह से प्रस्तुत करते हैं। जांच के दौरान यह भी कहा गया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत जो धन दिया गया उसका दुरूपयोग हुआ और दुर्भावना, धन और घृणा आदि में इस धन के उपयोग होने की बात सामने आई।

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