गांधी के चिंतन में भारत और विश्व की समस्याओं का समाधान

Oct 02 2015 06:14 PM
गांधी के चिंतन में भारत और विश्व की समस्याओं का समाधान

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज जन्म जयंती मनाई जा रही है। दूसरी ओर समूचे विश्व में कई तरह की चुनौतियां देखने को मिल रही हैं। ऐसे में विश्व भारत की ओर देख रहा है कि आखिर इन समस्याओं से कैसे निजात पाई जाए। विश्वभर में गोलियों और बंदूकों की थर्राती हुई आवाजें आ रही हैं। यही नहीं सारे विश्व में पर्यावरण संरक्षण पर बहस जारी है। विश्व पैसे की चाहत में भाग - भाग कर थक चुका है लेकिन इसके बाद भी विकसित हो या विकासशील देश आर्थिक व्यवस्था की बदहाली का रोना रो रहा है। अधिक पाने की चाहत में लोग कुछ खोते जा रहे हैं।

जीवन में झूठ का बोलबाला है। अधिक की चाहत में लोग संतोष करना भूल गए हैं। लोगों के निजी जीवन और प्रोफेशनल लाईफ से सुख छिनता जा रहा है। मगर जब विश्व महात्मा गांधी के सिद्धांतों की ओर विचार करता है तो उसे इन सभी समस्याओं का समाधान मिल जाता है। 

जीवन में सत्य बोलने का बहुत ही महत्व है। यदि आप झूठ बोलते हैं तो आपको लगातार झूठ बोलना पड़ता है। और एक बिंदू ऐसा आता है जब आप खुद ही परेशान हो जाते हैं और उलझकर रह जाते हैं। यही नहीं झूठ की यह स्थिति प्रारंभ में और कुछ समय तक तो आपको खुशी देती है इसमें आपके मन जैसा होने लगता है।

मगर कुछ समय बाद स्थिति आपके नियंत्रण से बाहर पहुंच जाती है और फिर आपका जीवन अवसद, असफलता और कई परेशानियों से घिरने लगता है। इसके विपरीत जब आप सच बोलते हैं तो केवल प्रारंभ में या कुछ समय तक आपको परेशान होना पड़ता है। मगर फिर आप सच बोलने की शक्ति से उस घटना या बात से मुक्त हो जाते हैं। जिसके कारण आपको तनाव नहीं होता।

यह आपको बेहद सुकून और आत्मसंतोष प्रदान करता है। और चीजें व्यवस्थित होने और समाप्त होने की कगार तक आप पहुंच जाते हैं इससे आपके दिल और मन को आराम मिलता है। अहिंसा से भी काफी बातें और परेशानियों का हल निकाला जा सकता है। इस समय वैश्विक स्तर पर साम्राज्य विस्तार के उद्देश्य से आतंकी कई देशों की ओर कूच कर रहे हैं।

विश्व में धर्म विशेष को लेकर लड़ाई कर वे मानवता का सर्वोपरि धर्म नष्ट कर रहे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान जैसा देश भी भारत के खिलाफ सीमा पार से आतंक का खेल खेलते हुए अब लगभग थक चुका है।

पाकिस्तान द्वारा आतंक को बढ़ावा देने के कारण अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में उसका स्थान प्रभावित हो रहा है। यही नहीं अब तो पाकिस्तान में भी आतंक और विभिन्न मसलों को लेकर विरोध उठने लगा है। पाकिस्तान में महिलाऐं खुलकर नीतियों और आतंक का विरोध करने के लिए निकल पड़ी हैं। 

अपरिग्रह से भी विश्व की समस्याओं का समाधान संभव है। आज भारत के कई माॅल ऐसे हैं जहां लोगों की भीड़ नहीं रहती इसके विपरीत छोटे दुकानदारों से लोग सामान खरीदते हैं। या मितव्ययीता अपनाते हुए बचत पर ध्यान देते हैं। दूसरी ओर लोग अपनी जरूरत के अनुसार क्रय करते हैं। ऐसे में अपरिग्रह से अच्छा कुछ नहीं है।

महात्मा गांधी ने ग्रामीण भारत के विकास पर जोर दिया था। ग्रामीण भारत के विकास से हमारा देश मजबूत होगा। वर्तमान में शहरों और मैट्रो में पलायन जारी है जिस कारण गांवों में सुविधा और रोजगार की कमी है लेकिन गांव में ही यदि मधुमक्खी पालन, मत्स्यपालन, कृषि, डेयरी व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण आदि के व्यवसायों को बढ़ावा दिया जाए तो यह बेहद अच्छा होता है। 

'लव गडकरी'