हरियाणा जाट आंदोलन के दौरान कई अफसरों ने नहीं निभाई अपनी ड्यूटीः रिपोर्ट

चंडीगढ़ : हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के संदर्भ में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश की है। उतर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि कैसे अधिकारियों ने हिंसा के दौरान ड्यूटी में कोताही बरती है।

सीएम मनोहर लाल खट्टर को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस अफसरों ने अपना फर्ज नहीं निभाया। दागी अधिकारियों में से ज्यादातर रोहतक जिले के है। प्रकाश सिंह ने साफ किया कि जाति के आधार पर कोई विश्लेषण नहीं किया गया है। मेरी मदद के लिए दो अधिकारी थे।

हरियाणा में जो कुछ भी हुआ, उसे देखकर हमेशा दुख होगा, गर्व करने जैसी कोई बात नहीं है। 8 जिले इस हिंसा के दौरान अधिक प्रभावित हुए है। टीम रोहतक, झज्जर, जिंद, हिसार, कैथल, भिवानी, सोनीपत और पानीपत जिलों में गई। हम प्रमुख घटनास्थलों पर गए और पीड़ितों से बात की।

डीजीपी ने बताया कि एक जिले में तो 250-400 लोग हमसे बात करने आए। सभी की बातें हमने धैर्य से सुनी। कई लोगों ने तो लिखित भी दिया। हमें 143 वीडियो फुटेज भी मिले। हमने जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई, जिसे हमने गृह विभाग को सौंप दिया है। उन्होने यह भी कहा कि इस काम के लिए 45 दिनों की डेडलाइन काफी कम थी।

रिपोर्ट्स दो भाग में है, पहले में 414 पेज है और दूसरे में 37 पेज है, जिसे गोपनीय रखा गया है। इसे केवल सरकार ही देख सकती है। कई अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की और कइयों ने बदमाशों को छूट दी। उन सबकी हमने पहचान की है। अब आगे सरकार देखेगी कि उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करनी है।

कुछ आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के बारे में भी प्रतिकूल टिप्पणी की है। सिपाही और हेडकांस्टेबल को अपने दायरे से बाहर रखा है। सब इंस्पेक्टर इन्चार्ज से शुरू होकर एसपी तक गया। 90 अधिकारियों के खिलाफ हमने टिप्पणी की है, जिसमें से एक तिहाई रोहतक में ही हैं। उन्होने कहा कि जल्द ही इन पर कार्रवाई की जाएगी। यदि इन पर कार्रवाई नहीं हुई, तो गलत संदेश जाएगा।

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