जल की शुद्धता बताएगा IIT कानपूर का नया इन्वेंशन 'पद्मावती'

कानपूर: देशभर में ऐसे कई क्षेत्र है, जहाँ लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल पाता है. वही कई स्थानों पर तो भूगर्भ पानी और स्वच्छ जल की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है. समस्याएं और अधिक केवल इसलिए बढ़ जाती हैं, क्योंकि आम आदमी इन चीज़ो  के बारे कुछ भी नहीं जानता है, कि उसके पास प्राप्त पानी में किस प्रकार का खतरा है. और ऐसे में वह हानिकारक जल का इस्तेमाल तब तक करता रहता है, जब तक कि उसे किसी तरह की कोई परेशानी महसूस न हो. 

हम आपको बता दे, की आईआईटी कानपुर ने इसी परेशानी का हल खोज निकाला है. आईआईटी कानपुर में इन्क्यूबेटेड, स्टार्ट-अप अर्थफेस एनालिटिक्स प्रा० लिमिटेड और कृत्स्नम टेक्नोलॉजीज प्रा० लिमिटेड ने स्मार्टफोन तकनीक के आधार पर कलरमीट्रिक टेस्ट-स्ट्रिप का प्रयोग करके जल की गुणवत्ता का विश्लेषण और निगरानी के लिए एक उपकरण विकसित किया है. वही आईआईटी कानपुर के पृथ्वी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ इंद्र सेन द्वारा बनाई गई इस डिवाइस में 2 मिनट से भी कम वक़्त में जल की क्वालिटी टेस्ट की जा सकेगी. 

प्रोफेसर सेन ने बताया, कि हम जल के रंग के आधार पर उसकी गुणवत्ता का आकलन करेंगे. इसमें रंग के 14 मानक होंगे, जिनके आधार पर जल में शामिल तत्वों के बारे में हम जान पाएंगे. वर्तमान आविष्कार पानी की गुणवत्ता की निगरानी में आने वाली सभी चुनौतियों का समाधान करेगा. इसमें स्मार्ट-फोन आधारित कलरमेट्रिक परीक्षण-पट्टी का प्रयोग किया जाता है, जो कई आवश्यक जल गुणवत्ता मानकों को तुरंत स्क्रीन करता है. प्रोफेसर सेन ने आगे कहा, कि इस डिवाइस का फायदा यह है, कि कोई भी व्यक्ति अपने घर में कम कीमत पर पानी का टेस्ट कर सकेगा. इसके लिए उसे एप में पद्मावती एप इंस्टाल करने की आवश्यकता पड़ेगी. और इस तरह हानिकारक जल का इस्तेमाल करने से हर प्राणी बच पाएगा.

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