लोकप्रिय शायर निदा फाज़ली का निधन

Feb 08 2016 03:54 PM
लोकप्रिय शायर निदा फाज़ली का निधन

नई दिल्ली : लोकप्रिय शायर निदा फाज़ली का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें पद्मश्री जैसे अलंकरण प्राप्त थे। निदा फाजली ने अपनी पंक्तियों से हिंदी फिल्मों के गीतों को पिरोया। इन गीतों में तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है, होश वालों को ख़बर क्या, बेखुदी क्या चीज़ है आदि पंक्तियां लोकप्रिय रहीं। निदा फाज़ली उर्दू के लोकप्रिय शायर कहे जाते हैं तो हिंदी के बेहद अलहदा गीतकार हैं। उनके गीत आज भी लोगों के मन को आनंदित कर देते हैं।

उन्होंने कुछ दिनों पहले इन्टॉलरेंस पर बयान दिया था, उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति और अमेरिका के राष्ट्रपति इन्टाॅलरेंस की चर्चा करते हैं तो इसमें किसी तरह का विरोध नहीं होताहै, लेकिन अगर कोई आम आदमी असहिष्णुता को मुद्दा बनाता है तो उसकी जाति पूछी जाती है। 

एक बारे फाजली पाकिस्तान गए तो एक मुशायरे में उन्होंने पड़ा कि, "घर से मस्जिद है बड़ी दूर, चलो ये कर लें। किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए॥" इसके बाद कट्टरपंथियों ने उनका घेराव कर लिया और उनके एक शेर पर एतराज जताया।

कट्टरपंथियों ने निदा से सवाल किया कि निदा किसी बच्चे को अल्लाह से भी अलग समझते हैं। तब निदा ने उत्तर दिया कि वे इतना जानते हैं कि मस्जिद इंसान के हाथ बनाते हैं जबकि बच्चे को तो अल्लाह ही बनाते हैं।

निदा फाजली द्वारा लिखे कुछ मशहूर गाने और गजलें

* घर से मस्जिद है बड़ी दूर, चलो ये कर लें।

किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए॥

* मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार

दिल ने दिल से बात की बिन चिठ्ठी बिन तार

* कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कहीं ज़मीं तो कहीं आस्माँ नहीं मिलता

* अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं

रुख़ हवाओं का जिधर का है, उधर के हम हैं

* होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है

* तुम्हारी कब्र पर जिसने तुम्हारा नाम लिखा है,

वो झूठा है, वो झूठा है, वो झूठा है,

तुम्हारी कब्र में मैं दफन तुम मुझमें जिन्दा हो,

कभी फुरसत मिले तो फातहा पढने चले आना