गरीब ब्राह्मण को मिला पारस पत्थर, उसने जो किया सुनकर नहीं होगा यकीन

आप सभी ने हिन्दू धर्म में अलग-अलग रत्नों और पत्थरों के बारे में पढ़ा या सुना होगा. वैसे सबका अपना अलग-अलग महत्व है. ऐसे में इन्हीं पत्थरों में से एक है पारस पत्थर. जी दरअसल पारस पत्थर को लेकर ऐसी मान्यता है कि ये चमत्कारी पत्थर लोहे से भी छू जाए तो उसे स्वर्ण में बदल देता है. वैसे आप सभी ने इसे लेकर बहुत सारी कहानियां सुनी होंगी ऐसे में इसे ही लेकर एक कहानी पुराणों में मिलती है.

जो कुछ इस प्रकार है. 'पुरानी कथा के अनुसार एक बार अपनी गरीबी से तंग आकर एक ब्राह्मण भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप करने लगा. शंकरजी ने उसे सपने में दर्शन देकर बताय कि वृंदावन में एक सनातन गोस्वामी हैं उनके पास जाकर पारस पत्थर मांगो उससे तुम्हारी निर्धनता दूर होगी. जब ब्राह्मण गोस्वामी से मिला तो उन्हें देखकर हैरान हो गया. उनके पास पारस पत्थर मिलने पर उसे शक हुआ क्योंकि उनके पास सिर्फ एक जीर्ण धोती और दुपट्टा था. फिर भी उसने गोस्वामीजी को अपनी निर्धनता के बारे में बताते हुए पारस पत्थर मांगा. गोस्वामी जी बोले जब एक दिन यमुना स्नान करके वह लौट रहे थे तभी किसी पत्थर से उनका पैर टकराया.

उसकी आभा देखकर उन्हें अद्भुत लगा और उन्होंने उसे वहीं जमीन की मिट्टी के नीचे गाढ़ दिया. ब्राह्मण से कहा कि जाकर वहां से पत्थर निकाल लो. जब ब्राह्मण को उस जगह का पता चला तो वह वहां गया और उसने पारस पत्थर निकाल लिया और साथ लाए लोहे के टुकड़े पर जब उसने स्पर्स कराया तो वह स्वर्ण में बदल गया. ब्राह्मण के मन में आया कि उस पत्थर के मालिक गोस्वामी जी हैं मगर वे इससे दूर रहना चाहते हैं. ब्राह्मण ने सोचा कि जरूर गोस्वामी जी के पास पारस पत्थर से भी ज्यादा मूल्यवान वस्तु है जो भगवत गीता की भक्ति से मिलती है. उसी पल उसने पारस पत्थर को वहीं दबाया और स्वर्ण नदीं में फेंककर गोस्वामी जी के पास दीक्षा ली. कहा जाता है उसके साफ मन ने उसके सभी कष्ट हर लिए उसे भगवत गीता का असीम सुख मिला.'

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