कश्मीर की आधुनिक बसाहट, प्रयोगधर्मी प्रधानमंत्री की सोच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत जो जहां जाती है वहां हजारों-लाखों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है। बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार में तो उनका यह असर साफतौर पर देखने को मिला है। मगर जम्मू-कश्मीर राज्य में भी हमें कुछ ऐसा ही असर देखने को मिल रहा है। जी हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू - कश्मीर राज्य में फिर आए। अबकी बार वे आए तो भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहार वाजपेयी की यादें भी ताज़ा हो आईं। ऐसे में शेर - ए कश्मीर स्टेडियम से लगा जैसे शेर दहाड़ रहा हो।

जी हां, वे आए तो जम्मू कश्मीर के निवासियों के लिए विकास भरी घोषणाऐं करने मगर वे कश्मीरियों का दिल जीत कर चले गए। मोदी ने सिर्फ दिल ही नहीं जीता उन्होंने कश्मीरी दिलों को भारत से जोड़ भी दिया। वे कश्मीरियों को विकास के सपने दिखाकर चले गए। वे कश्मीरी जो भटककर आतंक के रास्ते पर पहुंच चुके थे। 

हर रोज़ गोलियों और बमों की गूंज के कारण जिनका घर - बार, नौकरी, रोजगार और पढ़ाई छूट गई थी उन कश्मीरियों में फिर से नए कश्मीर की बसाहट का एक लक्ष्य बोना कोई आसान काम नहीं था। बोलने के लिए तो बहुत कुछ बोला जा सकता था। यूं भी नेताओं में बड़बोलापन होता है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाकशैली बेहद सटिक है। उन्होंने जो भी बोला कश्मीरियों के लिए ही बोला। इस दौरान वे कहीं भी राजनीतिक नहीं हुए। 

जम्मू - कश्मीर राज्य के विकास के लिए 83 हजार करोड़ रूपए का राहत पैकेज घोषित करने के साथ ही उन्होंने विकास के लिए आवश्यक तत्वों की रूपरेखा को सामने रखा। कश्मीरियों से उन्होंने कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत पर चलने की जो बात कही उसका बेहद गहरा मतलब लगाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को कोड किया लेकिन उनके भाषण में वह दर्द था जिसे बीते कई वर्षों से भारत झेल रहा है।

कहीं न कहीं उन्होंने इस बात को छुआ कि कश्मीर के युवा कश्मीर को अपना मानें क्योंकि भारत कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता है। ऐसे में कश्मीरी भारत के अपने हुए। दरअसल कश्मीर की वादियों से उस ज़हर को मिटाने की ज़रूरत है जिसके कारण कश्मीरी लोग पाकिस्तान की उसकसाहट भरी बातों में आ जाते हैं और यही प्रयास प्रारंभिक तौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया। 

आतंकवाद से लगभग तबाह हो चुके धरती के इस स्वर्ग को फिर से बसाकर विकासवादी घाटी बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने जो मंत्र दिए वे उनकी प्रयोगधर्मी सोच को दर्शाता है। दरअसल यहां उन्होंने पर्यटन के कई स्वरूपों पर चर्चा की। पहाड़ों पर बसे इस क्षेत्र के लिए उन्होंने एडवेंचर टूरिज्म, ईको टूरिज्म पर कार्य करने की बात तो कही साथ ही जम्मू - श्रीनगर मार्ग के लिए 34 हजार करोड़ रूपए के निवेश के साथ इस मार्ग की पहुंच दूरी को 3 घंटे करने की बात कर विकास का नया रास्ता खोला।

दरअसल यदि इस मार्ग पर इस तरह की सुविधाऐं जुटाई जाऐं कि लोग 3 घंटे में ही अपने गंतव्य तक पहुंच सके तो यह इस राज्य के लिए बहुत अहम होगा। इस दौरान सेना को भी अपने आॅपरेशन करने में आसानी होगी। ऐसे में इस राज्य की सुरक्षा का भी अच्छे से ध्यान रखा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से पशमिना शाॅल, सेव, और केसर की ग्लोबल मार्केटिंग और इसके निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग से समय की बचत की बात कर इसे एक नया आयाम दिया है इससे यहां के हथकरघा उद्योग को एक नयापन मिलेगा और इस उद्योग में लगे कारीगरों और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति भी अच्छी होगी।

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -