वन रैंक वन पेंशन पर फिर मिला लाॅलीपाॅप, सरकार ने दी सैद्धांतिक मंजूरी

नईदिल्ली: स्वाधीनता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से वन रैंक वन पेंशन की सैद्धांतिकतौर पर स्वीकार करने की बात भी कही और इसी के साथ ही पूर्व सैनिक खुशियां मनाने लगे साथ ही वर्तमान सैन्य कर्मियों में भी उत्साह छा गया। जब लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन रैंक वन पेंशन की बात की तो सभी खुश हो उठे। इस दौरान आयोजन स्थल पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। मगर इस योजना को लागू ना करने पर फिर सैनिकों में मायूसी छा गई.

मिली जानकारी के अनुसार पूर्व सैनिकों का कहना था कि वे इस तरह की योजना को प्रारंभ करने के लिए आंदोलन तेज़ कर सकते हैं यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सरकारी समारोह का बहिष्कार किया जा सकता है। दूसरी ओर विभिन्न योजनाओं को लागू न होने देने के लिए परेशानियां पहुंचाई जा सकती है। मामले  को लेकर पूर्व सैनिकों का कहना था कि वे विभिन्न योजनाओं को लागू करने के लिए आंदोलन तेज़ कर सकते हैं।

यही नहीं किसी भी सरकारी समारोह का बहिष्कार करने तक की बात पूर्व सैनिकों द्वारा कही गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से यह स्वीकार किया गया कि पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन के मसले पर किसी भी तरह के समाधान पर नहीं पहुंचा जा सकता। हालांकि उन्होंने सरकार को सैद्धांतिकतौर पर इसे स्वीकार करने की बात भी कही।

इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 90 मिनट के भाषण के अंत में करीब 20 वर्ष से अटके हुए इस विधेयक पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के सैनिक एक बड़ी संपत्ती हैं और वन रैंक वन पेंशन के प्रस्ताव पर सरकार के सामने लाया गया। हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया जा सका है लेकिन उन्होंने इसे सैद्धांतिकतौर पर स्वीकार करने की बात भी कही। 

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