बच्चो ने प्रधानमंत्री से पूछे रोचक सवाल, मिले मनोरंजक जवाब

Sep 04 2015 11:31 AM
बच्चो ने प्रधानमंत्री से पूछे रोचक सवाल, मिले मनोरंजक जवाब

नई दिल्ली : शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के मानेकशाॅ स्टेडियम में बच्चों के बीच पहुंचे। इस दौरान केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी भी उनके साथ मौजूद थी। इस दौरान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि सपने तब पूरे होते हैं जब मन में विश्वास हो और उसके लिए कोई शुरूआत हो। उन्होंने कहा कि सपने देखिए संकल्प लीजिए और उसमें विश्वास के साथ शुरूआत कीजिए। इस दौरान खचाखच भरे सभागार में विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का जोरदार स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विद्यार्थियों ने कुछ सवाल भी किए जिसमें सार्थक भारद्वाज ने सवाल किया कि डिजीटल इंडिया एक अच्छा कार्यक्रम है लेकिन भारत के क्षेत्रों में बिजली नहीं पहुंच पाती है। 

प्रधानमंत्री ने सार्थक को खाना बनाने के शौक के बारे में सवाल किया और सार्थक ने उस पर जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने उसकी पसंदीदा डीश को लेकर सवाल किया। इस दौरान उसने केक बनाने की बात की। प्रधानमंत्री नें कहा कि क्या तुम अपने साथियों को लैक्चर दे सकते हो कि क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए। 

प्रधानमंत्री ने उसके जवाब में कहा कि हमारे देश में 18 हजार गांव ऐसे हैं जहां बिजली नहीं है। बिजली नहीं है तो डिजीटल इंडिया कार्यक्रम को सोलर सिस्टम से चलाया जा सकता है। डिजीटल इंडिया कार्यक्रम से कोई भी अछूता नहीं रह सकता। ई गवर्नेंस का उपयोग करना है तो यह माध्यम अच्छा है।  एंपाॅवर मूवमेंट है यह। भारत 2020 आजादी के 75 वर्ष मनाए तब देश में हर कहीं बिजली आपूर्ती की जाए। यह हमारा लक्ष्य है। इस दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। 

सोनिया येलप्पा पाटील ने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि आपको कौन सा खेल पसंद है। इस पर उन्होंने येलप्पा से सवाल किए कि तुम्हें खेलने के लिए किसने प्रोत्साहित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब लड़कियां खेलने के लिए जाती हैं तब माता का बहुत बड़ा रोल होता है। लड़कियां किचन और घर काम में मदद करे। यह विचार करती हैं। इस बच्ची ने जो कमाल किया उसका बहुत अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री ने बड़े रोचक तरीके से कहा कि राजनीति वाले क्या खेलते हैं सभी को मालूम है। उन्होंने अपने बचपन का उल्लेख करते हुए कहा कि गांव में था तब कबड्डी - खो - खो खेलता था। काफी देर तक तालाब में तैरता था। कुछ आगे बढ़ा योगा की दुनिया मिल गई। फिर व्यायामशाला में सुबह 5 बजे जाता था। 

इस दौरान 5 छात्राओं के समूह ने प्रधानमंत्री से सवाल किया। जिसमे संजना बसंत, स्वस्ति, रविरा आदि ने सवाल किए। टीम पेंटागन द्वारा सवाल किया गया कि सरकार वेस्ट मैनेजमेंट क्षेत्र की चुनौतियों के साथ किस तरह से कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट पहले मुश्किल लग रहा था लेकिन अब मुश्किल नहीं लग रहा है। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को लेकर कहा कि यह हमारे स्वभाव से जुड़ा है यदि हम गंदगी को दूर करने की बात कर रहे हैं तो यह हमारे स्वभाव में आएगा। 3 साल का बच्चा भी घर में कहीं कचरा नहीं फैंकने देता। इस कार्यक्रम का हर कोई समर्थन कर रहा है।

मीडिया ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। लोक शिक्षा का कार्य हो रहा है। करीब 5 किलोमीटर के रेडियस पर केंचुऐं लाकर एक स्थान पर डाल देते हैं और यह कचरा कूड़ा इसमें डाल देते हैं तो वह उर्वरक हो जाता है। वेस्ट अपने आप में बहुत बड़ा उद्योग है। कई उद्योग वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में कार्य करने के लिए आ रहे हैं। गंदे पानी का निकास कैसे हो यह एक बड़ी समस्या है। इस दिशा में कई कार्य चल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस समूह ने वेस्ट मैनेजमेंट एप बनाकर नई पहल की है। 

विद्यार्थी अनमोल काबरा ने सवाल किया कि बच्चे इंजीनियरिंग आदि की तैयारी करते हैं लेकिन विद्यार्थी जीवन का उद्देश्य क्या है। क्या विद्यार्थी जीवन से ही सेक्रीफाईज करना विद्यार्थी जीवन का कार्य है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि माता पिता का एक स्वभाव होता है कि जो काम वे अपने जीवन में नहीं कर पाए वह उनकी संतान से करने की अपेक्षा हो जाती है। इसमें एक छोटा सा बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल में स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट और कैरेक्टर सर्टिफिकेट दिया जाता है। जो जेल में होता है उसके लिए भी दिया जाता है। मगर अब विभाग को बच्चों के लि एप्टीट्युट सर्टिफिकेट दिए जाने को कहा गया है। जिसमे यह विवरण दिया जाए कि उसके माता पिता को वह क्या कहता है उसके मित्रों को वह क्या कहता है कि उसे क्या करना चाहिए। उसकी रूचि क्या है। जब भी छोटा सा भी काम लेकर बहुत कुछ किया जा सकता है। केवल डिग्री और नौकरी के बारे में ही विचार करते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा भी वहीं तक सीमित हो जाती है यदि आपको कविता का शौक है तो आप कविता लिखिए, पेंटिंग का शौक है तो पेंटिंग कीजिए। यह सब आपको संतोष देगा।