जन्मदिन विशेष : रेलवे स्टेशन से लेकर PM की कुर्सी तक का सफर

Sep 17 2015 01:10 AM
जन्मदिन विशेष : रेलवे स्टेशन से लेकर PM की कुर्सी तक का सफर

नई दिल्ली : उत्तर गुजरात व तत्कालीन मुंबई स्टेट के मेहसाणा जिले के एक छोटे से गांव वडनगर में 17 सितंबर 1950 को मूलचंद मोदी के घर किलकारी गूंजी। जब उनके बेटे दामोदरदास की पत्नी हीराबेन ने एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया। यह तेजस्वी बालक और कोई नहीं स्वयं नरेंद्र मोदी थे। साधारण सा दिखने वाले इस बच्चे का बचपन चाय बेचते हुए गुजरा। नरेंद्र मोदी जब आठ साल के हुए तब से RSS के माध्यम से देश प्रेम की भावना से जुड़ गए। उसी दौरान वह वकील साहब नाम से प्रसिद्ध लक्ष्मण राव के संपर्क में आए। वह मोदी के राजनैतिक गुरु और मार्गदर्शक बने।

मोदी बाद में में तत्कालीन जनसंघ के नेता बसंत गजेंद्र गाड़कर और नाथालाल लाल जागड़ा के संपर्क में आए। भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास पर ध्यान केन्द्रित करने वाले संगठन, 1958 में उन्होंने RSS ज्वाइन किया और निःस्वार्थता, सामाजिक जवाबदारी, समर्पण एवं राष्ट्रवाद की भावना को अपनाया। 1967 में उन्होंने गुजरात के बाढ़ पीड़ितों की सेवा की। RSS में अपने कार्यकाल के दौरान श्री नरेन्द्र मोदी ने 19 महीने (जून 1975 से जनवरी 1977) की दीर्घावधि तक रहे भयंकर ‘आपातकाल’ के वक्त अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई। इस आपातकाल के समय में भी मोदी जी ने गुप्त तरीके से केन्द्र सरकार की फासीवादी नीतियों के खिलाफ जोशीले अंदाज में जंग छेड़ते हुए लोकतंत्र की भावना को जीवित रखा।

सन 1987 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। और मात्र एक वर्ष के कार्यकाल में ही उन्हें पार्टी की गुजरात इकाई का महामंत्री बना दिया गया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का बीड़ा खुद उठाया, उनके इस कार्य से पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलना शुरू हो गया और अप्रैल, 1990 में केन्द्र में गठबंधन सरकार अस्तित्व में आई। यह राजनीतिक गठबंधन कुछ महीनों ही चला और बाद में टूट गया | सन 1995 में BJP अपने दम पर गुजरात में दो-तिहाई बहुमत से विजय हासिल करने में सफल रही। 1995 में ही मोदी को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त कर दिया गया और देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी उनके हाथो में सौंपी दी गई, जो इस युवा नेता के लिए बड़ी उपलब्धि थी। 1998 में उनको इस पद से पदोन्नत हुई ओर उन्हे महासचिव (संगठन) के पद पर बैठा दिया गया।

2001 के अक्टूम्बर में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया| 7 अक्टूबर, 2001 को जब श्री मोदी ने मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ग्रहण की, उस समय गुजरात जनवरी 2001 में आए विनाशक भूकंप सहित अन्य कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा था। श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रतिकूल परिस्थितयों को सामना करते हुये इन परिस्थितयों को सर्वांगी विकास के अवसरों में तब्दील कर दिया, भूकंप में नाश हो गया भुज शहर इस बात का जीता-जागता सबूत है। अपनी सूझबूझ की वजह से दिसम्बर 2002 के आम चुनावों में भाजपा को मोदी ने भव्य वोटों से विजय दिलाई और मोदी सरकार 182 सीटों वाली विधानसभा में 128 सीटें से जीतकर भारी बहुमत के साथ चुनी गई।

2007 के चुनावों में भी मोदी की लहर कायम रही ओर भाजपा एक बार फिर भरी बहुमतों से विजयी हुई। 2012 के विधानसभा चुनाव में भी मोदी का जलवा चला ओर भाजपा गुजरात मे अपना विजय झण्डा गाड़ने मे कामियाब रही। भाजपा को 115 सीटें मिली और 26 दिसम्बर 2012 को मोदी ने लगातार चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री चुने गए। मोदी की कुशलता को देखते हुये भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के चुनाव का प्रचार के लिए मोदी को समिति का अध्यक्ष पद दिया। पद पर आने के कुछ दिन बीते ही थे की मोदी जी को प्रधानमंत्री प्रत्यासी घोषित कर दिया गया। भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमन्त्री प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद नरेन्द्र मोदी देश भ्रमण पर निकाल गए।

देश में 437 बड़ी चुनावी रैलियाँ समेत कुल 5827 कार्यक्रम किये। यह अद्भुत चुनाव प्रचार कार्यक्रम लाखों कार्यकर्ताओ की मदद लेकर मोदी जी ने चलाया। उनके इस प्रयास के करना भाजपा को 2014 के चुनावों में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त हुई। चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 336 सीटें जीतकर सबसे बड़े संसदीय दल के रूप में उभरा और अकेले भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों पर विजय प्राप्त की। 20 मई 2014 को संसद भवन में हुई बैठक में नरेन्द्र मोदी को सर्वसम्मति से भाजपा संसदीय दल और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का नेता घोषित किया गया। राष्ट्रपति ने नरेन्द्र मोदी को भारत का 15वाँ प्रधानमन्त्री नियुक्त किया। नरेन्द्र मोदी ने सोमवार 26 मई, 2014 को शाम 6 बजे प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली।