'पिंजरों, बंधनों से मुक्ति चाहता है आज का युवा..', नई शिक्षा नीति पर पीएम मोदी का सम्बोधन

नई दिल्ली: पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले एक साल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने में कोरोना महामारी के संकट काल में कड़ी मेहनत की गई है. दरअसल, पीएम मोदी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के एक वर्ष पूरा होने पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे हैं. पीएम मोदी ने अपने सम्बोधन में कहा कि, 'भविष्य में हम कितना आगे जाएंगे, कितनी ऊंचाई प्राप्त करेंगे, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने युवाओं को वर्तमान में यानि आज कैसी शिक्षा दे रहे है, कैसी दिशा दे रहे हैं. मैं मानता हूं भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में बड़े factors में से एक है.'  उन्होंने कहा कि '21वीं सदी का आज का युवा अपनी व्यवस्थाएं, अपनी दुनिया खुद अपने हिसाब से बनाना चाहता है. इसलिए, उसे exposure चाहिए, उसे पुराने बंधनों, पिंजरों से मुक्ति चाहिए. नई ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ युवाओं को ये विश्वास दिलाती है कि देश अब पूरी तरह से उनके साथ है, उनके हौसलों के साथ है. जिस आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस के प्रोग्राम को अभी लॉंच किया गया है, वो भी हमारे युवाओं को future oriented बनाएगा, AI driven economy के रास्ते खोलेगा. ' 

पीएम मोदी ने कहा कि, हमने-आपने दशकों से ये माहौल देखा है जब समझा जाता था कि अच्छी पढ़ाई करने के लिए विदेश ही जाना होगा. लेकिन अच्छी पढ़ाई के लिए विदेशों से स्टूडेंट्स भारत आयें, बेस्ट institutions भारत आयें, ये अब हम देखने जा रहे हैं.'  बता दें कि नई शिक्षा नीति 2020 (NEP) पर आयोजित किए गए कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान भी उपस्थित हैं. नई शिक्षा नीति (NEP) को एक वर्ष पूर्व आज के दिन ही लागू किया गया था. इससे पहले, 34 वर्ष पुरानी शिक्षा नीति में संशोधन किया गया था. धर्मेन्द्र प्रधान ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस शिक्षा नीति के तहत भारत अंतर्राष्ट्रीय ताकत बनेगा. नई शिक्षा नीति के तहत केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से शिक्षा क्षेत्र पर देश की GDP के 6 फीसद हिस्से के बराबर निवेश का टारगेट रखा गया है. NEP के अंतर्गत ही 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय' का नाम बदल कर 'शिक्षा मंत्रालय' करने को भी हरी झंडी दे दी गई है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली पढाई से लेकर उच्च शिक्षा तक कई संशोधन किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों का पूर्ण रूप से विकास और उन्हें विश्व स्तर पर मजबूत बनाना है.

नई शिक्षा नीति में स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई बड़े संशोधन किए गए हैं. पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया गया है. इससे उन स्टूडेंट्स को बहुत लाभ होगा, जिनकी पढ़ाई बीच में किसी कारण से छूट जाती है. जब धर्मेंद्र  प्रधान ने शिक्षा मंत्री का पद संभाला था, तब उन्होंने कहा था कि उनका फोकस राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करने पर रहेगा. शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखते हुए कहा है कि पीएम मोदी के संबोधन के बाद भी कार्यक्रम में उपस्थित रहें क्योंकि तीन विभिन्न विषयों पर वेबीनार भी होने हैं.

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