मन की बात: जनधन खाते से लेकर स्वच्छता तक को लेकर PM मोदी ने की बात

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 81वें एपिसोड को संबोधित किया. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- 'सदियों से जिस परंपराओं से हम जुड़े हैं उससे जोड़ने वाला ये दिन है 'वर्ल्ड रिवर डे' यानी 'विश्व नदी दिवस'. हमारे यहां कहा गया है - "पिबन्ति नद्यः, स्वय-मेव नाम्भः अर्थात् नदियाँ अपना जल खुद नहीं पीती, बल्कि परोपकार के लिये देती हैं. जिसका मतलब है हमारे लिये नदियां एक भौतिक वस्तु नहीं है, हमारे लिए नदी एक जीवंत इकाई है, तभी तो हम नदियों को मां कहते हैं.'

इसी के साथ उन्होंने कहा, ''हमारे आज के नौजवान को ये जरूर जानना चाहिए कि साफ-सफाई के अभियान ने कैसे आजादी के आंदोलन को निरंतर ऊर्जा दी थी। ये महात्मा गांधी ही तो थे, जिन्होंने स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने का काम किया था। महात्मा गांधी ने स्वच्छता को स्वाधीनता के सपने के साथ जोड़ दिया था।''

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा, 'आजकल एक विशेष ई-आक्शन चल रहा। ये इलेक्ट्रानिक नीलामी उन उपहारों की हो रही है, जो मुझे समय-समय पर लोगों ने दिए हैं। इस नीलामी से जो पैसा आएगा, वो नमामि गंगे अभियान के लिये ही समर्पित किया जाता है। भारत में स्नान करते समय एक श्लोक बोलने की परंपरा रही है। गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिं कुरु। पहले हमारे घरों में परिवार के बड़े ये श्लोक बच्चों को याद करवाते थे और इससे हमारे देश में नदियों को लेकर आस्था भी पैदा होती थी। विशाल भारत का एक मानचित्र मन में अंकित हो जाता था। नदियों के प्रति जुड़ाव बनता था।'

आगे उन्होंने कहा- 'जनधन खातों को लेकर जो अभियान शुरू किया उसकी वजह से गरीबों के हक का पैसा उनके खातों में जा रहा है। भ्रष्टाचार में कमी आई है। इसमें टेक्नोलॉजी मदद कर सकती है। आज गांव देहात में भी यूपीआई से लेनदेन की दिशा में सामान्य आदमी जुड़ रहा है।' इसी के साथ उन्होंने कहा- 'कुछ ही दिन पहले सियाचिन के दुर्गम इलाके में 8 दिव्यांग जनों की टीम ने जो कमाल कर दिखाया है वो हर देशवासी के लिए गर्व की बात है."

इस टीम ने सियाचिन ग्लेशियर की 15 हज़ार फीट से भी ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित ‘कुमार पोस्ट' पर अपना परचम लहराकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है. इन जांबाज दिव्यांगों के नाम है - महेश नेहरा, उत्तराखंड के अक्षत रावत, महाराष्ट्र के पुष्पक गवांडे, हरियाणा के अजय कुमार, लद्दाख के लोब्सांग चोस्पेल, तमिलनाडु के मेजर द्वारकेश, जम्मू-कश्मीर के इरफ़ान अहमद मीर और हिमाचल प्रदेश की चोन्जिन एन्गमो. शरीर की चुनौतियों के बावजूद भी हमारे इन दिव्यांगों ने जो कारनामा कर दिखाया है वो पूरे देश के लिए प्रेरणा है.'

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