पितृपक्ष: श्राद्ध में ना खाए बासी भोजन वरना..

आप सभी जानते ही होंगे कि  भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन की अमावस्या तक की अवधि को पितृपक्ष या महालय के कहा जाता है और गरुड़ पुराण में लिखा है कि देह त्यागकर पितृलोक को गए पूर्वज इन 15 दिनों में सूक्ष्म शरीर के साथ पृथ्वी पर आते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच रहते हैं इस दौरान उनका अच्छे से आदर-सत्कार किया जाना चाहिए. ऐसे में इस दौरान क्या करना चाहिए वह आज हम आपको बताने जा रहे हैं. जी हाँ, जब आप श्राद्ध करते हैं तो आपको क्या करना चाहिए वह आज हम आपको बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं और इस के साथ हम आपको यह भी बताएंगे कि क्या नहीं करना चाहिए श्राद्ध में और अगर आप करते हैं तो आपको बहुत बड़ा पाप लग सकता है. इस वजह से इन बातों का ध्यान रखे.


क्या करें- 
-काले तिल से अंजलि दें
-ब्राह्मण को भोजन कराएं
-पशु-पक्षी विशेष रूप से कौवे को अन्न जल आदि अवश्य दें

पितृपक्ष में क्या ना करें
-इस अवधि में अपने घर किसी भी रुप में आए अतिथि का अनादर न करें
-पितृपक्ष में किसी भी जीव को परेशान ना करें
-बासी भोजन ना करें
-पेड़-पौधे ना काटे
-नया वस्त्र धारण न करें
-मांस मदिरा लेते हो तो पितृपक्ष में इसका अवश्य त्याग करें.

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