जन्मदिन विशेष 'फूलन देवी' : चंबल के जंगलों से सियासत तक का सफ़र

जन्मदिन विशेष 'फूलन देवी' : चंबल के जंगलों से सियासत तक का सफ़र

फूलन देवी एक ऐसा नाम जिसने ना केवल डकैती की दुनिया में बल्कि सियासत के गलियारों में भी खूब नाम कमाया. छोटी सी उम्र में दुनिया का बड़े से बड़ा दर्द सहने वाली फूलन देवी का जन्म आज ही के दिन साल 1963 में हुआ था. फूलन का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव गोरहा का पूर्वा में एक मल्लाह के घर हुअा था. उनका जीवन काफी उतार-चढाव भरा रहा हैं. मात्र 11 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे बुरा दिन देख लिया था. 11 वर्ष की उम्र में वे विवाह के बंधन में बांध गई थी. हालांकि जल्द ही उन्हें पति और परिवार ने छोड़ दिया था. 11 साल की एक मासूम बच्ची के लिए यह सब कुछ सहन करना काफी कठिन था. 

बचपन से ही उन्हें कई तरह के दुःखों का सामना करना पड़ा. इन सबसे आहत होकर उन्होंने डकैती का हाथ थामा और वे धीरे-धीरे डकैतों की गैंग की मुखिया बनकर उभरी. हालांकि इस नर्क की दुनिया में भी उन्हें कई बार बुरे बर्ताव से गुजरना पड़ा. गिरोह बनाने से पहले गांव के कुछ लोगों ने कथित तौर पर फूलन के साथ दुराचार किया था. जहां बदले की आग में फूलन ने बीहड का रास्‍ता अपनाया. 

डकैती की दुनिया में कदम रखने के बाद फूलन देवी साल 1981 में हर किसी की जुबान पर अचानक से चर्चा का का विषय बन गई. 80 के जातिगत भेदभाव के दशक में फूलन देवी ने एक साथ ऊंची जाति  के 22 लोगों की हत्या कर दी थी. सभी (ठाकुर) जाति के (ज़मींदार) लोग थे. हालांकि फूलन ने इनकी मौत से इंकार कर दिया था. बाद में फूलन ने बौद्ध धर्म अपनाया और वे फिर राजनीतिक गलियारों में कदम रखने को तैयार हुई. जहां 1996 में फूलन ने उत्तर प्रदेश की भदोही सीट से (लोकसभा) चुनाव जीता और वह सांसद बनी. फूलन देवी अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय नहीं रह सकी और साल 2001 में 25 जुलाई को दिल्ली स्थित उनके आवास पर ही शेर सिंह राणा ने उनकी हत्या कर दी गई. 

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