इन दो वजहों से श्री कृष्ण धारण करते हैं मोरपंख

भगवान श्रीकृष्ण के बारे में ऐसे कई रहस्य हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं. ऐसे में हम सभी इस बात से वाकिफ हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को मोर मुकुट धारी कहते हैं क्योंकि वे अपने मुकुट पर मोर पंख धारण करते थे. वहीं मोरपंख धारण करने के कई कारण बताए जाते हैं, और अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं मोर पंख धारण करने की दो कथा.

1. राधा की निशानी : कहते हैं एक बार श्रीकृष्‍ण राधा के साथ नृत्य कर रहे थे तभी उनके साथ ही झूमकर नृत्य कर रहे एक मोर का पंख भूमि पर गिर गया तो प्रभु श्रीकृष्ण ने उठाकर उसे अपने सिर पर धारण कर लिया. जब राधाजी ने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि इन मोरों के नाचने में उन्हें राधाजी का प्रेम दिखता है. कहते हैं कि श्री राधा रानी के यहां बहुत सारे मोर थे. केवल इतना ही नहीं यह भी कहते हैं कि बचपन से ही माता यशोदा अपने लल्ला के सर इस मोर पंख को सजाती थीं. वैजयंती माला के साथ ही मोर पंख धारण करने की एक बड़ी वजह राधा से उनका अटूट प्रेम है. मात्र इस एक बात के अलवा अन्य बातें सिर्फ मनमानी है.

2. जीवन के सभी रंग : आप सभी जानते ही हैं कि मोरपंख में सभी रंग समहाहित है. वहीं भगवान श्रीकृष्ण का जीवन कभी एक जैसा नहीं रहा. ऐसे में उनके जीवन में सुख और दुख के अलावा कई अन्य तरह के भाव भी थे और मोरपंख में भी कई रंग होते हैं. इसी के साथ यह जीवन रंगीन है लेकिन यदि आप दुःखी मन से जीवन को देखेंगे तो हर रंग बेरंग लगेगा और प्रसन्न मन से देखेंगे तो यह दुनिया बहुत ही सुंदर है बिल्कुल मोरपंख की तरह. इस कारण भगवान श्री कृष्णा इसे धारण करते हैं.

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