शहीद होने से पहले हज़ारो जिंदगी बचा गया स्टील मैन...

छत्तीसगढ़ : अपनी बहादुरी और जांबाजी के कारण स्टील मैन के नाम से पहचाने वाले जांबाज सिपाही नरेंद्र सिंह चौधरी. अब इस दुनिया में नहीं रहे. देश की सेवा करते करते शहीद हो गए. 256 बम अकेले डिफ्यूज करने वाले और 50 किलोमीटर तक बिना खाये पीये चलने वाले नरेंद्र चौधरी एक परीक्षण के दौरान ग्रेनेड धमाके में शहीद हो गए. जब स्टील मैन का पार्थिव शरीर रायपुर ले जाया गया तो हर किसी की ऑंखें नम थी.

छत्तीसगढ़ के कांकेर में जंगल वारफेयर काॅलेज में तैनात 48 वर्षीय नरेंद्र सिंह चौधरी इतने एक्टिव थे कि बिना खाये पिए पूरी फुर्ती के साथ 50 किमी तक की दूरी आसानी से तय कर लेते थे. वह कभी बीमार भी नहीं पड़ते थे. नक्सल इलाके में अब तक 256 बम डिफ्यूज करने वाले चौधरी की बुधवार को ग्रेनेड की चपेट में आने से मौत हो गई नरेंद्र कांकेर के जंगल वारफेयर काॅलेज में बम डिफ्यूज करने की ट्रेनिंग दे रहे थे. इस दौरान नरेंद्र ने एक ग्रेनेड फेंका. सात सेकेंड बाद भी जब वह नहीं फटा तो वे उसे देखने धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे. इस दौरान अचानक धमक हुआ और बम का एक टुकड़ा सीधे नरेंद्र की दाहिनी आंख से होते हुए अंदर जा धंसा. जिससे उनकी मौत हो गई. नक्सलियों के नापाक इरादों को निस्तोनाबूत करने वाले और सेकड़ो बमो को निष्क्रिय कर हज़ारो ज़िंदगीया बचाने वाले नरेंद्र सिंह चौधरी शहीद हो गए.

मीडिया का कर्त्यव होता है कि वह देश हिट और समाज हिट कि ख़बरें दिखाकर समाज को सजगर करे लेकिन मसालेदार ख़बरें और पैसो कि बढ़ती मांग के चक्कर में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अपनी सीमा लांघ रहा है. शायद इसी कारण जांबाज नरेंद्र चौधरी कि वीरगाथा कि ख़बरें मीडिया से अछूती रह गई. नरेंद्र अपनी बहादुरी के कारण हमेशा नक्सलियों के टार्गेट पर थे. वह हमेशा कहते थे कि उनकी मौत बम फटने से ही होगी और छत्तीसगढ़ में ही होगी. हुआ भी वैसा ही. अफ़सोस देश ने एक वीरजवान खो दिया. नरेंद्र सिंह चौधरी शहीद हो गए. ऐसे वीर जवान को हम सलाम करते है.

न्यूज़ ट्रैक परिवार शहीद नरेंद्र सिंह चौधरी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उनके परिवार को यह दुःख सहने कि शक्ति प्रदान करे.

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