पत्थरो को रोते देखा है

पत्थरो को रोते देखा है

बुरे वक्त में अपनों को दूर होते देखा है।

कई बार अपने सपने चूर होते देखा है।

कहते है पत्थर कभी रोते नहीं,

पर हमने अक्सर पत्थरो को रोते हुए देखा है।

हमारे सामने वो नकाब में निकले।

हम उनकी फ़िराक में निकले।

कर बैठे हम प्यार उनसे,

इंकार करते रहे वो मेरी मोहब्बत से,

पर हमारी तस्वीर वो अपनी,

किताब में रखते है।