मसूद अजहर को आतंकी करार नहीं करने में हो रही सियासत

न्यूयार्क : पठानकोट हमले के मास्टर माइंड मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकियों की सूची में डालने को लेकर हो रही देरी पर भारत ने आपत्ति लेते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी ) के रवैये पर भारत ने नाराजगी व्यक्त की. भारत ने कहा कि इस मामले में 9 माह से सिर्फ राजनीति हो रही है.

इस सन्दर्भ में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के रवैये पर भारत ने नाराजगी जाहिर की. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि जो संगठन पहले से ही आतंकी सूची में है, उसके नेता को आतंकवादी घोषित करने में 9 महीने का वक्त क्यों लग रहा है. यूएनएससी अपनी सियासत में उलझी है. चीन दो बार तकनीकी तौर पर अजहर का समर्थन कर चुका है.

गौरतलब है कि 31 मार्च 2016 में भारत ने पठानकोट हमले के मास्टर माइंड अजहर मसूद को आतंकवादी घोषित करने की मांग के साथ 1267 समिति को अर्जी दी गई थी लेकिन यूएनएससी के स्थाई सदस्य चीन ने इस पर असहमति जता कर विरोध किया. बता दें कि 15 सदस्यों में से चीन अकेला था, जिसने वीटो का इस्तेमाल करते हुए भारत की अर्जी के बाद होने वाली प्रक्रिया पर रोक लगा दी. इससे मामला 6 महीने के लिए अटक गया था, जबकि 14 देश अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने पर राजी थे.

इसके बाद सितंबर में दूसरी बार चीन ने फिर अड़ंगा लगाया. इस मामले पर तीन महीने का उसने फिर अतिरिक्त समय मांगा. इतना होने के बावजूद दोबारा इसकी मियाद बढ़ाने पर चीन ने कहा कि भारत की अर्जी में अभी भी परेशानी है. बता दें कि यदि अजहर मसूद को आतंकियों के लिए सूची में शामिल किया जाता है तो यह भारत के लिए बड़ी सफलता होगी. इसके बाद अजहर मसूद की संपत्ति जब्त की जा सकेगी. वह खुलेआम पाकिस्तान में रैलियां नहीं कर सकेगा, जैसा कि अभी वह करता है. उसका एक देश से दूसरे देश में आने जाने पर रोक लग जाएगी. बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद को पहले से ही प्रतिबन्धित किया जा चुका है.

NSG को लेकर चीन के रूख में नहीं हुआ बदलाव

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