पटेल आरक्षण की मांग, आरक्षण या इलेक्शन कैंपेन

Aug 25 2015 02:45 PM
पटेल आरक्षण की मांग, आरक्षण या इलेक्शन कैंपेन

नई दिल्ली : देशभर में विभिन्न समुदायों और जातियों द्वारा आरक्षण की मांग किए जाने की बात नई नहीं है। मगर हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद से उठी पटेल और पाटीदार आरक्षण की मांग ने हाल में ज़ोर पकड़ा तो हर किसी की नज़र उस ओर पहुंची और फिर इन्होंने इस ओर ध्यान दिया। हालांकि इस आंदोलन को महज पटेल आंदोलन का नाम दिया गया लेकिन वास्तविकता में यह मोदी के गढ़ गुजरात में आम आदमी पार्टी की दस्तक थी। जी हां, आम आदमी पार्टी से जुड़े हार्दिक पटेल ने गुजरात में पटेल आरक्षण की मांग उठाई। इसी के साथ उन्होंने महाराष्ट्र में काफी पहले से की जा रही पाटिल आरक्षण की आवाज़ को समर्थन दिया।

अन्य राज्यों में पाटीदार की तरह जाने जाने वाले पाटीदार समुदाय को अपने साथ जोड़कर हार्दिक पटेल ने अपनी राजनीतिक बिसात को मजबूत किया। दरअसल मध्यप्रदेश और अन्य क्षेत्रों में ये पाटीदार मूलरूप से कृषि कार्य से जुड़े होते हैं। यह वर्ग काफी संपन्न माना जाता है और गुजरात और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी इस वर्ग की तादाद बड़े पैमाने पर है। जिस तरह से हार्दिक पटेल ने जीएमसी मैदान से अपनी बात कही, वह राजनीति का सुनियोजित ड्रामा लग रहा था। अप्रत्यक्ष तौर पर आम आदमी पार्टी इस मसले को उठा रही है

हालांकि हार्दिक पटेल ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि हम पार्टी नहीं पाटीदार हैं और किसी पार्टी विशेष के नहीं हैं लेकिन जिस तरह की कैंपेनिंग इस जनआंदोलन के लिए की गई उसमें आम आदमी पार्टी की झलक ही नज़र आई। आरक्षण की मांग करने वाले समर्थक मैं पाटीदार हूं पंच लाईन की केजरी टोपी पहने नज़र आए। अपने उद्बोधन में उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की प्रशंसा कर कहा कि नीतिश कुमार हमारा है।

इससे स्पष्ट होता है कि भविष्य में आम आदमी पार्टी इस आंदोलन को अपना समर्थन देकर खुले तौर पर इसे राजनीतिक स्वरूप दे सकती है और गुजरात में बड़़ा वोट बैंक बनाने का प्रयास कर सकती है। दूसरी ओर साफतौर पर हार्दिक ने भाजपा सरकार को वर्ष 2017 के चुनावों में सत्ता से हटाए जाने के परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। जिससे जाहिर होता है कि हार्दिक आम आदमी पार्टी के माध्यम से यहां किसी बड़ी तैयारी में हैं।

हालांकि सरकार पर फिलहाल पटेल आरक्षण का कोई असर नहीं हुआ है और सरकार ने आंदोलनकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है। मगर हार्दिक ने यहां किसान आत्महत्या का उल्लेख कर किसान वर्ग को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। दूसरी ओर उन्होंने अपने प्रयासों को मैराथन की तरह बताया। ऐसे में इस बात में संदेह नहीं जताया जा सकता कि हार्दिक और उनके समर्थक वर्ष 2017 में आम आदमी पार्टी को राज्य में लांच करने की तैयारी में लगे हैं।