आज से शुरू हुआ श्वेतांबर जैन मतावलंबियों का पर्युषण पर्व

श्वेतांबर जैन समाज के पर्युषण पर्व आज यानी शनिवार से आरम्भ हो रहे हैं। अगले आठ दिनों तक सामाजिक लोग तप, त्याग, स्वाध्याय, उपासना के साथ अपना आत्मबल मजबूत करेंगे। विश्व के सबसे प्राचीन धर्म जैन धर्म को श्रमणों का धर्म बोला जाता है। जैन धर्म का संस्थापक ऋषभ देव को कहा जाता है, जो जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे तथा देश के चक्रवर्ती सम्राट भरत के पिता थे। 

वही वेदों में पहले तीर्थंकर ऋषभनाथ का उल्लेख प्राप्त होता है। जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं। तीर्थंकर अरिहंतों में से ही होते हैं। जैन संस्कृति में जितने भी त्यौहार मनाए जाते हैं, तकरीबन सभी में तप एवं साधना की खास अहमियत है। श्वेतांबर जैन समाज के अध्यक्ष चंपालाल भंडारी ने कहा कि पर्युषण पर्व जैनों का अत्यधिक अहम त्यौहार है। पर्युषण पर्व का शाब्दिक अर्थ है- आत्मा में अवस्थित होना। पर्युषण का एक अर्थ है? कर्मों का नाश करना। 

वही कर्मरूपी दुश्मनों का नाश होगा तभी आत्मा अपने स्वरूप में अवस्थित होगी अतः यह पर्युषण?पर्व आत्मा का आत्मा में निवास करने की प्रेरणा देता है। यह सभी त्योहारों का राजा है। इसे आत्मशोधन का त्यौहार भी बोला गया है, जिसमें तप कर कर्मों की निर्जरा कर अपनी काया को निर्मल बनाया जा सकता है। पर्युषण त्यौहार को आध्यात्मिक दीवाली की भी संज्ञा दी गई है। जिस प्रकार दीवाली पर कारोबारी अपने संपूर्ण वर्ष का आय-व्यय का पूरा हिसाब करते हैं, गृहस्थ अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, ठीक उसी प्रकार पर्युषण पर्व के आने पर जैन धर्म को मानने वाले व्यक्ति अपने साल भर के पुण्य पाप का पूरा हिसाब करते हैं।

बचपन से ही सामान्य बच्चों की तरह नहीं थे पद्म विभूषण और विश्व योग गुरु जग्गी वासुदेव

'500 रुपए लो और अपने भगवानों को गाली दो...', यूपी में खुलेआम चल रहा ईसाई धर्मान्तरण का रैकेट

'हिन्दू लड़कियों को फंसाने के लिए मुस्लिम युवाओं को पैसे देता है इमाम..', पुलिस ने दर्ज किया केस

 

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -