साई में खिलाडि़यों को प्रतिनिधित्व न देने पर उठे सवाल

नई दिल्ली : संसद की स्थायी समिति द्वारा खेल की पृष्ठभूमि न रखने वाले व्यक्तियों की नियुक्ति करने के साथ नौकरशाही प्रणाली को जारी रखने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को आड़े हाथ लिया है। जिसमें कहा गया है कि संसद की स्थायी समिति द्वारा 270वीं रिपोर्ट में हैरानी जताई गई। साई की कार्यप्रणाली में यह भी कहा गया कि किसी भी तरह के स्तर पर खिलाडि़यों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। यही नहीं 1995 में बोझिल विशालकाय नौकरशाह संगठन के पुनर्गठन की बात कही गई है। 

मामले में यह बात कही गई है कि पूर्णकालिक चेयरमैन सह प्रबंधन निदेश ही साई के महानिदेशक पद पर काबिज होने चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति में किसी तरह का बदलाव नहीं आया है। अब नौकरशाही वैसे ही कार्य कर रही है। मामले में यह भी कहा गया है कि समिति चाहती है कि इस तरह की स्थितियों में सुधारवादी कदम उठाने की आवश्यकता है। मामले में कहा गया है कि सत्यनारायण जैतिया के नेतृत्व में साई की कार्यप्रणाली में खिलाडि़यों के सम्मिलित होने से प्रत्येक स्तर पर बनियादी ढांचा, खेल सुविधाऐं लाने में सहायता मिल सकती है।

खिलाड़ी इस बात से परिचित होते हैं कि खिलाडि़यों के लिए आखिर किस तरह की सुविधाऐं, बुनियादी ढांचा, कोचिंग, खानपान, ट्रेनिंग और सहायक सेवा की आवश्यकता है। साई द्वारा अपने क्षेत्रीय केंद्रों पर क्षेत्रीय प्रमुख निदेशक की अनिवार्यता की बात कही गई है। इन केंद्रों में बेंगलुरू, कोलकाता, गांधीनगर, भोपाल, सोनीपत, चंडीगढ़, लखनऊ, इंफाल और गुवाहाटी के क्षेत्रीय निदेशक होना जरूरी है। 

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