नेपाली संसद में संविधान निर्माण पर सहमति

काठमांडू : नेपाल में बीते 25 अप्रैल और और इसके बाद रहरहकर आए भूकंप से जमकर तबाही मची। तबाही का यह मंज़र अभी भी याद कर नेपालवासी सिहर उठते हैं। आज भी वहां राहत कार्य चल रहा है साथ ही उजड़े मकानों को फिर से बनाने का काम चल रहा है। इस बीच वहां के संविधान बनाने को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच चली आ रही खींचतान अब दूर हो गई है।मिली जानकारी के अनुसार राजनीतिक दल ने लगभग 16 सूत्र के समझौतों पर रजामंदी जता दी है। जिसमें नेपाल के अंतर्गत आने वाले 8 राज्य में संघीय व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है। यही नहीं मामले में कहा गया है कि शासन के लिए संसदीय प्रणाली, संयुक्त निर्वाचन माॅडल और करीब 10 वर्ष के लिए संवैधानिक न्यायालय का गठन किए जाने को लेकर अनुमति दे दी गई है।

इस मसौदे में कहा गया है कि संघीय सरकार और राज्य सरकार के साथ विभिन्न राज्यों के मध्य होने वाले विवाद को सुलझाने के लिए संवैधानिक अदालत को जिम्मेदारी देना, प्रांतों का सीमांकन करने के लिए संघीय आयोग का गठन, आयोग के कार्यकाल को 6 माह करना और आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद संसद के विभिन्न प्रांतों के सीमांकन को लेकर बहुमत के आधार पर निर्णय लेने पर विचार किया जा सकता है।

मामले में जिन दलों ने इस मसौदे को समर्थन प्रदान किया है उनमें नेपाली कांग्रेस, सीपीएन - यूएमएल, यूसीपीएन (माओवादी), मधेसी पीपुल्स राईट फोरम - डेमोक्रेटिक (एफपीआरएफ - डी ) आदि शामिल हैं। नेपाल की इस 601 सदस्यों वाली संविधान सभा में लगभग 490 सीटों के प्रतिनिधित्व वाली 4 प्रमुख पार्टियों को राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी, सीपीएन ने भी अंगीकार करने की बात कही है।

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