एक युग प्रवर्तक ऋषि : पं. आचार्य श्रीराम शर्मा

अक्सर आप शांति, सन्मार्ग और आध्यात्मिक उन्नति की तलाश में रहते हैं। कई बार ऐसा होता है जब आप जीवन के प्रश्नों को तलाशते हैं। कभी आपके पास कुछ नहीं होता तो, आप परेशान होकर चैतन्य की खोज में निकल जाते हैं तो, कभी आप भौतिक संपदा से समृद्ध होते हैं मगर आत्मिक शांति का अभाव होता है, ऐसे में आप चेतना को जानने के लिए निकल जाते हैं।

कई लोगों का परिचय, आध्यात्मिक संस्था अखिल विश्व गायत्री परिवार से हो जाती है। आपको यहाॅं आकर शांति मिलती है। यहाॅं पर आप आध्यात्मिक चेतना और, शक्ति को लेकर जो ज्ञान प्राप्त करते हैं, वह आपके लिए एक दीव्य शक्ति बन जाता है। यहाॅं आप पं. आचार्य श्री राम शर्मा का नाम जानते हैं और, उन्हें धन्यवाद देते हैं। मगर क्या आप जानते हैं, आखिर कौन थे ये पं. आचार्य श्रीराम शर्मा।

आचार्य श्रीराम शर्मा का जन्म  आश्विन कृष्ण त्रयोदशी विक्रम संवत 1967 को हुआ था। वे उत्तरप्रदेश राज्य के आगरा के आॅंवलखेड़ा गाॅंव में जन्मे थे। उनके पिता श्री पं. रूपकिशोर शर्मा एक विद्वान और राजपुरोहित थे। आचार्य शर्मा का जन्म जमींदार घराने में हुआ था लेकिन, बचपन से ही उनमें धार्मिक भावों का विकास हुआ था। इसी धार्मिक भावना से प्रेरित होकर वे हिमालय की ओर भाग निकले थे लेकिन पकड़े गए थे।

हालांकि वर्ष 1926 उन्हें महामना पं. मदन मोहन मालवीय ने गायत्री मंत्र की दीक्षा दी। काशी में दीक्षा मिलने के बाद अभ्यास से उनकी चेतना जागृत हुई। उन्होंने कुष्ठ रोगियों के लिए काम करना प्रारंभ कर दिया था। बेरोजगार युवाओं और नारी शक्ति के लिए उन्होंने कार्य किए। इस वर्ग को स्वावलंबी बनाया। इसके बाद वे आगे बढ़ते चले गए। उन्होंने वर्ष 1927 से 1933 तक स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने आध्यात्मिक चेतना के साथ परोपकार के भाव जागृत करने के उद्देश्य से अखंड ज्योति पत्रिका का प्रकाशन किया। पत्रिका घर - घर तक पहुॅंचने लगी। पं. आचार्य श्री राम शर्मा के हितकारी कार्यों में उनकी पत्नी,भगवती देवी शर्मा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें माॅं, गुरू माॅं कहा जाता था। पं. आचार्य श्रीराम शर्मा को गुरूदेव के नाम से जाना जाने लगा। अखिल विश्व गायत्री परिवार के माध्यम से और अपनी पत्रिका अखंड ज्योति के माध्यम से उन्होंने गीता के मर्म को लोगों तक पहुॅंचाया।

आज यह संस्था आध्यात्मिक रूस से लोगों को सौहार्द और शांति का संदेश तो दे रही है, साथ ही योग,वेद,ज्योतिष आदि महत्वपूर्ण विषयों के ज्ञान का प्रसार भी किया जा रहा है। पं. श्रीराम शर्मा युग प्रवर्तन के लिए प्रयास करते हुए 2 जून 1990 को देवलोक को चले गए। अपने जीवन के अंतिम दौर में भी गुरू देव ने लोगों के बीच "हम बदलेंगे युग बदलेगा" मंत्र का प्रसार किया।

 

 

 

 

 

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